कहते हैं बहाना बनाने वालों को सिर्फ़ उतना ही मिलता है, जितना मेहनत करने वाले छोड़ देते हैं. कामयाबी की रहा थोड़ी मुश्किल ज़रूर होती है, लेकिन अगर लगन और जज़्बा हो, तो आपको कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता.

15 वर्षीय अभय गुप्ता जो एक स्टूडेंट हैं, की कहानी भी कुछ ऐसी है. इस लड़के पास और बच्चों की तरह पढ़ने के लिए तमाम आधुनिक साधन नहीं थे, न ही ख़ुद का रूम था. वो कभी स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठ कर पढ़ाई किया करता था और आज उसने ICSE की बोर्ड परीक्षा में 93 प्रतिशत नबंर हासिल कर, अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया.

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अभय एक बेहद ग़रीब फ़ैमिली से आता है, जिसके पिता रामबाबू पिछले 20 सालों से कोलकाता की पार्क स्ट्रीट के पास न्यूज़ पेपर, मैगज़ीन और सेकेंड हैंड क़िताबें बेचते हैं और उन्हीं पैसों से उनका घर चलता है. रामबाबू के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो अपने बेटे को पढ़ाने के लिए तमाम सुख-सुविधाएं दे पाए, लेकिन अभय ने भी कभी लग्ज़री लाइफ़ की चाह नहीं रखी और जैसे-तैसे सिर्फ़ अपनी पढ़ाई पर फ़ोकस किया.

एक होनहार छात्र की मेहनत और लगन देखते हुए उसके टीचर्स ने भी उसे पूरा सहयोग दिया और उन्होंने अभय को फ़्री ट्यूशन देनी शुरू की. Harrow Hall School के प्रिसिंपल जगमोहन सिंह ने बताया कि 'वो मेहनती होने के साथ-साथ एक अनुशासित छात्र भी है.'

अभय के पिता चाहते थे कि वो और उसका भाई एक-दूसरे से अंग्रज़ी में बात करें, साथ ही अंग्रेज़ी नॉवल्स पढ़ें, जो कि वो इतने सालों से बेचते आ रहे हैं. बीते सोमवार को अपने बेटे को बोर्ड परीक्षा में टॉप करते देख अभय के पिता की आंखों में खु़शी के आंसू छलक आये. इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि 'मेरा सपना धीर-धीरे वास्तविकता में बदल रहा है. अभय करीब दो साल का होगा, जब उसे St. James' School में भर्ती कराया गया था.'

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कठिन हालातों में अपने पिता के सपनों को साकार करने वाले अभय ने अपनी इस सफ़लता का ज़िक्र करते हुए बताया, 'हम जॉइंट फ़ैमिली में रहते हैं, इसीलिए मेरे पास पढ़ने के लिए जगह नहीं थी. इसी वजह से मैंने स्कूल से फ़्री होने के बाद 7 बजे लेकर 10.30 तक, कभी स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई की, तो कभी होटल लॉबी में.'

पढ़ाई के अलावा अभय को खेल में भी काफ़ी दिलचस्पी है और उसका सपना है कि वो अागे चल कर IIT-JEE का Entrance एग्ज़ाम पास करे. अभय की सफ़लता का मंत्र है, 'लंबे समय तक पढ़ाई मत करो, जितनी भी देर करो मन से करो.'

Source : TheBetterIndia