भारत एक ऐसा देश जहां की एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे है. इनमें से लाखों-करोड़ों लोग ऐसे हैं, जो अपना जीवन भीख मांग कर काट रहे हैं. लोगों की गरीबी को बड़े स्तर पर देखें, तो वो एक व्य​वस्थित क्राइम भी बन चुकी है, जिसमें मानव तस्करी, गरीबों का उत्पीड़न और कई अलग क्राइम शामिल हैं.

भारत में इस व्यापक ग़ैरक़ानूनी व्यापार से लड़ना एक मुश्किल काम है. इस समुदाय की जड़ें कुछ इस अंदाज़ में फैली हुई हैं, जिसे न उखाड़ा जा सकता है और न ही काटा जा सकता है.

आपको ये जान कर हैरानी होगी कि लगभग 20 भारतीय राज्यों और 2 संघ शासित प्रदेशों में भीख मांगना ​क्राइम है.

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बीते दिनों Nyaaya (एक आॅनलाइन पोर्टल, जो कि भारतीय राज्य और केन्द्रीय कानून को आसान भाषा में प्रकाशित करती है) ने इस क़ानून का पूरा विवरण अपनी वेबसाइट पर दिया था. इसके बाद Hindustan Times ने इसकी पूरी रिर्पोट प्रकाशित की.

रिपोर्ट के अनुसार Indian Code of Criminal Procedure द्वारा भीख मांगने को एक संज्ञेय अपराध माना जाता है. मतलब अगर पुलिस को आशंका ​है कि कोई व्यक्ति भिखारी है, तो वो उसे बिना किसी कोर्ट के आॅर्डर या वारंट के गिरफ़्तार कर सकती है.

कई राज्यों ने अपनी पुलिस को ये छूट दी है कि वो किसी भी उस व्यक्ति को गिरफ़्तार कर सकते हैं, जो भिखारी जैसा दिख रहा हो या पुलिस को उस पर शक हो. ये एक ग़ैरजमानती अपराध है.

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भारत के अलग-अलग राज्यो में ये क़ानून बदलता रहता है. असम और तमिलनाडु के अलावा भारत के कई राज्यो में किसी भी उस व्यक्ति को भिखारी घोषित किया जा सकता है, जो सार्वजनिक स्थान में घूम रहा हो और जिसे देख कर नहीं लगता कि वो अपना जीवन यापन करने योग्य है. आसान भाषा में अगर आप गरीब दिख रहे हैं, तो आप गिरफ़्तार हो सकते हैं. इस क़ानून का इतना बुरी तरह से इस्तेमाल होता है कि पुलिस अकसर काम करने वाले बेघर लोगों और बंजारे समुदाय को भिखारी घोषित करके जेल में भेज देती है.

कर्नाटक और असम में अगर कोई भगवान के नाम पर पैसे मांग रहा है, तो वो भीख नहीं है, लेकिन अगर वही अगर गाना गाकर, नाच कर या कोई कर्तब दिखा कर पैसे मांग रहा है, तो वो ग़ैरक़ानूनी कानूनी है.

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कई ऐसे कानून हैं, जो ऐसे लोगों को हिरासत में लेने की आज़ादी देते हैं, जो उन भिखारियों पर निर्भर हैं, जो गिरफ़्तार हुए हैं. हिमाचल प्रदेश में तो ये भी क़ानून है कि जो लोग किसी भिखारी पर निर्भर हैं, उन्हें जेल भी हो सकती है.

रिर्पोट के अंत में Model Bill 2016, Persons in Destitution का ​भी ज़िक्र किया गया था, जिसमें क़ानून है कि जिन लोगों को संरक्षण, देखभाल और पुनर्वास की आवश्यकता है उन्हें भी समाज की मुख्य धारा में लेकर आया जाए.

भीख मांगने को आपराधिक बता कर सरकार उन लोगों के लिए परेशानी बढ़ा रही है, जो पहले से ही परेशान हैं. इसके अलावा सरकार चाहे तो ऐसे लोगों के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोल कर इन्हें किसी कार्य योग्य बना सकती है.

पूरी रिपोर्ट के लिए यहां क्लिक करें.

Article Source- Hindustan Times