इसी साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर दिल्ली के मशहूर फ़ोटोग्राफ़र नीरज गेरा ने “सेक्रेड ट्रांस्फॉर्मेशन्स” के नाम से सोलो एक्ज़िबीशन आयोजित की थी, जिसमें एसिड एटैक फ़ाइटर्स के जीवन के हर पहलु को बड़ी ही खूबसूरती के साथ दर्शाया गया. इस प्रदर्शनी में रखी फ़ोटोग्राफ़्स में सभी महिलाओं का पॉवरफ़ुल रिफ्लैक्शन झलकता है.

गौरतलब है कि साल 2014 में जंतर-मंतर पर तेजाब हमले के पीडि़तों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की थी. भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की मांग थी कि तेजाब की खुली बिक्री का सरकार रोक लगाये या उसका नियमन करे.

इस हड़ताल के दो साल बीतने के बाद उन्होंने तेजाब हमले के पीडि़तों की प्रेरणादायी कहानी को कई तस्वीरों के जरिए बयां किया, जो 6 मार्च को अर्पणा कौर गैलरी में आयिजित सैक्रेड ट्रांसफॉर्मेशन्स शीर्षक वाली प्रदर्शनी का हिस्सा भी बनी थीं. इस प्रदर्शनी में महिलाओं के जीवन के विभिन्न भावुक चरणों को प्रदर्शित किया गया था. ऐसी महिलाएं जो किसी न किसी रूप में हिंसा का शिकार हुई थीं, लेकिन उन्होंने अपने साहस और हिम्मत का परिचय देते हुए ज़िन्दगी की इस लादी में जीत हासिल की.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन तस्वीरों में ‘Stop Acid Attacks’, अभियान का चेहरा रहीं लक्ष्मी के साथ रूपाली, मां-बेटी गीता और नीतू की कहानी और उनकी तस्वीरों के ज़रिये उनके गुस्से, दर्द, प्रेम और संघर्ष को दिखाया गया था. गीता और उसकी बेटी पर उसके पति ने ही तेज़ाब डाला था.

फ़ोटोग्राफ़र नीरज गेरा बताते हैं कि इस फ़ोटो सीरीज़ में उन्होंने इन एसिड अटैक विक्टिम्स पर हुए हमलों से सम्बंधित जानकारी को दिखाने की कोशिश की है. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि एसिड की शिकार हुई इन महिलाओं में से ज़्यादातर पर या तो मित्रों या परिवार या किसी जान-पहचान के व्यक्ति ने हमला किया था.

दिल्ली के फ़ोटोग्राफ़र नीरज गेरा ने इन तस्वीरों में बेहतरीन रंग उकेरे का उस हादसे की हर शक्ल को बयां किया है कि कैसे एसिड अटैक की शिकार ये महिलाएं दुनिया से छुपी व डरी हुई रहती हैं? एसिड अटैक के वक़्त और उसके बाद में इनके ऊपर क्या बीता? ये कोई नहीं समझ सकता.

मगर नीरज ने केवल इनकी दुःखभरी कहानी को ही दर्शाने की कोशिश नहीं की है, बल्कि रंगों के माध्यम से कैनवास पर इन फाइटर्स का दूसरा अस्तित्व भी दिखाया. सशक्तिकरण की तरफ आगे बढ़ती इन महिलाओं को परिवार व दोस्तो का प्यार मिला और इस बैसाखी को पाकर उन्होंने अपनी राह में आते बंधनों को तोड़ा और आजाद समाज में गहरी सांस ली.

नीरज ने बताया कि, मैं एक फ़ोटोग्राफ़र होने के साथ-साथ आर्ट ऑफ लिविंग का टीचर भी हूं. 2014 में दिल्ली में हुए प्रोटैस्ट मार्च में पहली बार मैं इन महिलाओं से मिला था. इनकी आपबीती जानकर मैं इन सभी के साथ इमोशनली अटैच हो गया था और उनकी मदद करने के बारे में सोचने लगा था. मैंने उन्हें योगा व ध्यान के जरिए अन्दर से सशक्त व मजबूत बनाया, जिससे वो अपने जख़्मों से पूरी तरह उभर सकें.

इन फ़ोटोज़ में इन महिलाओं के दर्द और साहस की कहानी है:

Source: b'Photographer Neeraj Gera'

Source: metro