कुछ ख़बरें ऐसी होती हैं, जिन्हें पढ़कर या देखकर दिल ख़ुश और आंखें नम हो जाती हैं. ऐसी ही दिल को छू लेने वाली एक ख़बर मुंबई से भी आई है. सालों बाद जब किसी भी मां-बेटी का मिलन होता है, तो क्या होता होगा. इस लम्हे को शब्दों में बंया कर पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है.

भारतीय मूल की स्‍वीडिश नागरिक नीलाक्षी एलिज़ाबेथ जोरेंडल को 1976 में एक विदेशी जोड़े ने गोद ले लिया था. उस वक़्त नीलाक्षी एलिज़ाबेथ महज़ 3 साल की थी. वैसे नीलाक्षी एलिज़ाबेथ की कहानी, किसी फ़िल्म की कहानी से कम नहीं है. बड़े होने पर एक दिन अचानक नीलाक्षी को पता चलता है कि बचपन से जिन लोगों को वो अपने माता-पिता समझती थी, वो उसके सगे मम्मी-पापा नहीं है. बल्कि वो उनकी गोद ली हुई बेटी है और उसकी रियल मम्मी मुंबई में रहती है. इसके बाद नीलाक्षी को अपनी सगी मां से मिलने की तड़प होने लगी. नीलाक्षी एलिज़ाबेथ जोरेंडल पिछले 27 साल से अपनी मां को ख़ोजने के लिए भारत आ रही थी. लेकिन हर बार वो नाकामयाब रही.

वो कहते हैं न 'जहां चाह, वहां राह'. 27 साल तक निराशा हाथ लगने के बाद भी 44 साल की नीलाक्षी ने हार नहीं मानी. आख़िर वो दिन आ ही गया, जब नीलाक्षी पुणे स्थित एनजीओ, अगेंस्‍ट चाइल्‍ड ट्रैफ़िकिंग की अंजलि पवार के माध्‍यम से अपनी बायोलॉजिकल मां को ढूंढ पाने में कामयाब रहीं.

बीते शनिवार को मानों, 44 साल की नीलाक्षी को जन्मों की ख़ुशियां मिल गई हों. इस ख़ास लम्हे के बारे बात करते हुए अंजलि पवार ने बताया, 'यवतमाल के सरकारी अस्‍पताल में ये पल बेहद भावुक कर देने वाला था. सालों बाद मिली मां-बेटी की आंखों में खुशी के आंसू थे.'

क्या है मामला

दरअसल, नीलाक्षी के बायोलॉजिकल पिता एक खेत मजदूर थे, जिन्‍होंने 1973 में किसी कारण से आत्महत्या कर ली थी. उसी साल पुणे के पास केदगांव स्थित पंडित रमाबाई मुक्ति मिशन के शेल्‍टर एंड एडॉप्‍शन होम में नीलाक्षी का जन्म हुआ. नीलाक्षी के जन्म के बाद उसकी मां ने उसे वहीं छोड़ दिया और दूसरी शादी कर ली, जिससे उन्हें एक बेटा और एक बेटी भी है.

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नीलाक्षी की बायोलॉजिकल मां इन दिनों काफ़ी बीमारी चल रही है. वहीं नीलाक्षी ने अपनी मां से इलाज के लिए हर संभव मदद का वादा भी किया है.

Source : ndtv