बात 1988 की है, तीन लोगों ने ट्रेन में एक भोले आदमी को नशे की दावा देकर उससे 370 रुपये चुरा लिए थे. बात को 29 साल बीत गए, चोरों ने भी सोचा होगा कि अब कोई क्या ही सज़ा देगा उनको. लेकिन कोर्ट ने इस बार धप्पा कर दिया और साबित कर दिया कि कोर्ट में भी देर है पर अंधेर नहीं. चोरी करने वालों को पूरे पांच साल की सज़ा सुनाई गयी है.

तीन में से एक था चंद्र पाल, जिसकी 2004 में मृत्यु हो गयी. बचे कन्हैया लाल और सर्वेश, जो अब 60 साल के हो चुके हैं, बड़े-बड़े बच्चे भी हैं. पर किसी ने सही ही कहा है, "कर्मा इज़ अ बिच", जो किया है, भोगना तो पड़ेगा ही. ये दोनों उन ख़ुशकिस्मत अपराधियों में से नहीं निकले, जो क़ानून के चंगुल से बच निकलते हैं.

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बरेली कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है, जिसमें उन दोनों पर दस-दस हज़ार का जुर्माना भी लगा है. उस वक़्त इन लोगों ने वाजिद हुसैन को नशीला पदार्थ मिला कर चाय पिला दी थी. ट्रेन सहारनपुर से पंजाब जा रही थी. IPC धारा 379 के तहत इन लोगों पर मुकदमा चल रहा था.

59 वर्षीय हुसैन 2012 में आखरी बार कोर्ट आये थे. उत्तर प्रदेश के हरदोई के निवासी दोनों आरोपी अब अपनी गलती के लिए शर्मिंदा हैं. उनका कहना है कि उनकी असली सज़ा तो लम्बा चला ट्रायल था.

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