यूपी में योगी के सत्ता में आते ही, उत्तर प्रदेश पुलिस के काम करने का अंदाज़ कुछ बदला-बदला सा लग रहा है. इसका ताज़ा उदाहरण शाहजहांपुर में देखने को मिला. आला अधिकारी के सख़्त निर्देश के बाद शाहजहांपुर में पुलिस ने 72 घंटों के अंदर ही तमाम गुमशुदा लड़कियों को ढूंढ निकाला.

एस.पी. सिटी, के.बी. सिंह ने इलाके के दर्जनों पुलिसवालों को अलग-अलग थाना क्षेत्रों से गायब हुईं 39 लड़कियों के पेंडिंग मामलों को निपटाने को लेकर चेतावनी दी और नतीजा ये रहा कि कुछ घंटों में 27 लड़कियां खोज निकाली गईं. वहीं अन्य लापता 12 लड़कियों की तालाश अब भी जारी है.

पुलिस वालों के लिए 'करो या मरो' का सख़्त निर्देश

इस इलाके में पुलिसवालों के लिए 'करो या मरो' का सख़्त निर्देश है. इस काम में लापरवाही बरतने वाले 8 सब इंस्पेक्टरों का पहले ही पुलिस लाइन्स में तबादला किया जा चुका है और समान रैंक के 24 अन्य को बेहतर प्रदर्शन के लिए 48 घंटों का वक़्त दिया गया है.

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2015-2016 से पेंडिंग थे मामले

शाहजहांपुर इलाके में धारा 363 (किडनैपिंग) और 366 (किडनैपिंग, शादी के लिए मजबूर किए जाने) के तहत 39 मामले पेंडिंग पड़े थे. लड़कियों के परिजन बार-बार उन्हें खोज निकालने के लिए शिकायतें लेकर आते थे. इनमें से ज़्यादातर मामले 2016 से पेंडिंग पड़े थे. इनमें एक नाबालिग लड़की का भी मामला था, जो 2015 से पेंडिंग था. के.बी. सिंह से चेतावनी मिलने के बाद नाबालिग लड़की की तलाश तेज़ कर दी गई और उसे सुरक्षित बचा कर लिया गया. मामला रोज़ा थानाक्षेत्र का था.

लापता लड़कियों में से दो को 30 किमी दूर के क्षेत्र से बचाया गया, तीन को 55 किमी दूर से खोज निकाला गया. वहीं, एक लड़की को चंडीगढ़ से वापस लाया गया और दो को इलाहाबाद से.अधिकारियों ने बताया कि इन मामलों को सुलझाने के लिए पुलिसवालों को पूरी छूट दी गई थी, उन्हें कहा गया था कि जल्द से जल्द इन लड़कियों को खोजकर इनके घरवालों तक पहुंचाया जाए.

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हम तो यही कहेंगे कि यूपी पुलिस देर आई, दुरुस्त आई. पुलिस इसी सख़्ती के साथ काम करती रही, तो वो दिन दूर नहीं, जब शहर-शहर यूपी की कानून व्यवस्था के चर्चे होंगे.

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