आप सब ने Airlift फ़िल्म तो देख ही ली होगी, और जिन लोगों ने नहीं देखी है वो एक बार ज़रूर देख कर आएं. हम फ़िल्म का प्रमोशन नहीं कर रहे हैं. हम तो बस आपसे कह रहे हैं कि लोगों को किसी देश से बचाने के लिए किए गए ऑपरेशन के बारे में जानने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा. ये फ़िल्म एक सच्ची कहानी पर आधारित है. इस फ़िल्म में अक्षय कुमार का रोल Mathunny Mathews के जीवन पर आधारित था. जिन्होंने सच में वहां के हालातों को झेला था. Mathunny Mathews के बेटे जो उस वक़्त उनके साथ थे उनका कहना है कि 'मेरे पापा इस फ़िल्म में नज़र नहीं आए, अक्षय कुमार का भी नाम इस फ़िल्म में पापा के नाम से अलग रखा गया. फ़िर भी पापा काफ़ी खुश हैं कि लोग अब उनके बारे में जानते हैं और वहां बसे भारतीयों ने जो झेला इसके बारे में भी लोगों को पता चला'.

 

इस पूरे ऑपरेशन में करीब 1 लाख 70 हजार भारतीयों को देश वापस लाया गया था, लेकिन ये इतना आसान नहीं था. Mathunny Mathews अगर वहां नहीं होते तो शायद ये मुमकिन भी नहीं होता.

 

Mathunny Mathews कुवैत के एक बिज़नेसमैन थे. जिनके पास कुछ भारतीय भी काम करते थे. Mathunny Mathews अगर चाहते तो बड़े आराम से अपने परिवार के साथ वहां से निकल सकते थे, लेकिन उन्होंने 1 लाख 70 हजार भारतीयों को वहां से निकालने का जिम्मा उठाया. करीब 59 दिनों तक चले इस ऑपरेशन के बाद Mathunny Mathews की मेहनत सफ़ल रही.

देश में कुछ ऐसे हीरोज़ हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते. बॉलीवुड हमें उन हीरोज़ से मिलवाता है उनके बारे में बताता है. AirlIft जैसी फ़िल्में देखने के बाद लगता है कि बॉलीवुड सेक्स और फ़ैमली ड्रामे के बाहर भी बेहतर फ़िल्में बना सकता है और उसे लगातार ऐसी फ़िल्में बनाते रहना चाहिए.