भारत एक ऐसा देश है जहां के हर कोने, हर कण में कला और संस्कृति बसती है. यहां की ऐतिहासिक इमारतों से लेकर हाल ही में बनायी गयीं इमारतों में आप कला का बेजोड़ नमूना देख सकते हैं. दिल्ली हो या राजस्थान या फिर हो कोलकाता कला के क्षेत्र में हर राज्य अपनी एक अलग पहचान रखता है. ऐसा ही एक शहर है कोलकाता. हालांकि, कोलकाता को अनौपचारिक रूप से तो देश की कला और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार कर लिया गया है. लेकिन इसमें शहर की सड़कों पर हो रही कलाकारी का कोई योगदान नहीं माना गया है क्योंकि कोलकाता की अधिकतर असंचरित और निर्माणाधीन सड़कों का कला परिदृश्य अभी भी एक पहचान की तलाश में हैं.

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देश की दूसरी सड़कों की तरह ही कोलकाता की दीवारें हमेशा से भित्तिचित्रों के साथ समृद्ध रही हैं, जो राजनीतिक और धार्मिक प्रकृति के डूडल प्रदर्शित करती हैं. हालांकि, राजनीतिक एजेंडा के साथ ही पॉलिटिकल पार्टीज़ का वोटों के लिए विज्ञापन और प्रतिद्वंद्वी पार्टियों की अस्वीकृति हमेशा इस कला के लिए एक प्रेरक बल रहा है. मगर दुर्भाग्य की बात है कि इस काम को कभी भी कला की दृष्टि नहीं देखा जाता था.

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यहां तक कि मुंबई और दिल्ली जैसे अन्य शहरों में पिछले दशक में विचारशील सड़क के उद्भव होने के बावजूद, पिछले दो दशक के शुरूआती दौर में राजनैतिक पार्टियों के विज्ञापन के लिए प्राथमिक सार्वजनिक कला का प्रतीक रहीं कोलकाता की सड़कों की कलाकारी आज भी पहचान की तलाश में हैं.

पिछले कुछ सालों से, कोलकाता की दीवारों को सड़कों के कलाकारों द्वारा शानदार बनाया गया है, जो शहर की उदासीन दीवारों में क्रांतिकारी बदलाव लाने और राजनीतिक भित्तिचित्रों से इसे इन्हें दोबारा प्राप्त करने के लिए निर्धारित हैं. Zypher और K-krew जैसे ग्रुप्स के साथ-साथ जाने माने और फ़ेमस SNIK के कलाकार एक बार फिर शहर की सड़कों की दीवारों को अपनी कलाकारी से सजायेंगे. इनमें से अधिकतर की थीम में कवर किए जाने वाले प्रमुख विषयों में रंगीन डूडल, लोकप्रिय संस्कृति के चित्र और सामाजिक-राजनीतिक कमेंटरी शामिल होंगी.

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इसमें शहर के फ़ेमस स्पॉट्स की सड़कों पर आपको आने वाले समय में ये कलाकारी देखने को मिलेगी. इन स्पॉट्स में शहर की व्यस्त सड़कों से लेकर यहां की प्रतिष्ठित पार्क स्ट्रीट और कलाकारों की कॉलोनी, जो त्योहारों में काफ़ी व्यस्त हो जाती है, को भी शामिल किया जाएगा. हालांकि, माना जा रहा है कि कोलकाता के मेट्रो स्टेशनों में भी सार्वजनिक कला दृश्यों का पुनर्निर्माण करने के लिए शहर के प्रयास ज़्यादा स्पष्ट हैं. कोलकाता ने अपने मुख्य मेट्रो स्टेशनों में गतिशील भित्ति चित्रों और अन्य कलाकृतियां बनाने के लिए एक सार्थक प्रयास किया है, ताकि कोलकाता के दैनिक परिचालन को बचाया जा सके.

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शहर के सबसे व्यस्त मेट्रो स्टेशनों, जैसे एस्प्लानाडे, मध्य, रबिंद सदन, दम-दम और चांदनी चौक के बाहरी इलाकों में बने जीवन के प्रति जागरूक करते सिरेमिक भित्ति चित्र और पेंटिंग की प्रशंसा करते हुए लोगों को भी देखा जा सकता है.

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