एक तरफ जहां पीएम मोदी की पूरी दुनिया में प्रंशसा हो रही है, वहीं देश के लोग उनके लिए मन में जहर भर कर बैठे हैं. अभी हाल ही में आपने सुना होगा कि विश्व बैंक के प्रेसिडेंट ने भी मोदी के इस क़दम की सराहना की थी. बॉलीवुड के स्टार्स भी मोदी के इस क़दम का समर्थन कर रहे हैं. हां, ये भी सच है कि इस फ़ैसले की आलोचना भी की जा रही है. कई लोग ऐसे होंगे, जो इस अचानक लिए गये फ़ैसले के कारण बड़ी परेशानी में पड़ गये हैं. हमारे देश में विरोध जताने की आज़ादी है. आप खुलेआम किसी फ़ैसले या बयान के प्रति अपना विरोध जता सकते हैं या शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकते हैं. पर कभी आपने सोचा है कि कोई राजनीतिक छवि का आदमी किसी के साथ मिलकर देश के शीर्ष पद पर बैठे प्रतिनिधि को खुलेआम गरियाने में साथ देने लगे तो, क्या आलम होगा?

अमर सिंह को तो आप जानते ही होंगे. जी वहीं अमर सिंह, जो मुलायम सिंह की पार्टी के नेता हैं. उन्हें समाजवादी पार्टी में विभीषण भी माना जाता रहा है. प्रधानमंत्री द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद किये जाने के फ़ैसले का अमर सिंह और उनके दोस्तों को बड़ा दुःख हुआ है. ऐसा हम नहीं कह रहे, ये आप खुद ही देख लीजिए. एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसमें अमर सिंह अपने दोस्त के साथ खड़े हैं और उनका दोस्त नोटबंदी फ़ैसले से इतना आहत है कि प्रधानमंत्री मोदी को गंदी-गंदी गालियां दे रहा है. अमर सिंह कभी अपने दोस्त की ओर देख कर तो कभी कैमरे की ओर देख कर मुस्कुरा रहे हैं.

क्या लोकतांत्रिक होने का ये मतलब है कि विरोध में किसी को गालियां देना शुरू कर दो. इस फुटेज में अमर सिंह का मुंह देख कर ऐसा लगता है कि राजनीति खुद इतनी शर्मसार कभी नहीं थी. अभी हाल ही में मायावती के लिए एक बीजेपी नेता ने अपशब्द बोला था, तब पूरे देश में इसकी आलोचना की गयी थी. अमर सिंह और उनके इस घटिया दोस्त ने बस नरेंद्र मोदी का ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री पद का भी अपमान किया है और इस पद के अपमान का मतलब है देश का अपमान. अगर आपको इस फ़ैसले से इतनी ही परेशानी है तो इसके खिलाफ़ कोर्ट में याचिका दाखिल कीजिए या विरोधियों के साथ प्रदर्शन शुरू कीजिए. पर इतना याद रखिये कि मोदी जी का विरोध करने वाला कोई आदमी भी प्रधानमंत्री का अपमान नहीं बर्दाश्त नहीं करेगा.

इन लोगों के खिलाफ़ पार्टी को, न्यायालय को कड़ी से कड़ी कारवाई करनी चाहिए. हो सकता है कि आपका विरोध जायज़ है. पर इतना याद रखना, कोई भी विरोध देश या देश की गरिमा से बड़ा नहीं हो सकता.

Source: Postpickle