January 20, 2018 17:32:28

ज़िन्दगी से भरा एक लड़का आज जूझ रहा है जिंदगी के लिए, आप उसकी मदद कर सकते हैं

by Komal

आम तौर पर ज़ुकाम-बुख़ार हो जाने पर भी लोग ऑफ़िस कॉलेज आदि से छुट्टी ले लेते हैं, लेकन हर्ष ने अपनी ज़िन्दगी को एक जानलेवा बीमारी से जूझते हुए भी भरपूर जिया. आज उसे हम सबकी मदद की ज़रूरत है. अपना ज़रा सा समय निकाल कर उसकी कहानी ज़रूर जानें.

हर्ष को Aplastic Anemia नाम की जानलेवा बीमारी है. ये बीमारी करोड़ों में किसी एक को होती है, दुर्भाग्यवश ये हर्ष को हुई. इस बीमारी में Bone Marrow और शरीर में खून बनाने वाले Hematopoietic Stem Cells ख़राब हो जाते हैं. इस बीमारी के कारण हर्ष के शरीर में ख़ून नहीं बन पा रहा है और उसकी जान ख़तरे में है.

दिल्ली के धर्मशिला नारायण अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है. डॉक्टर्स ने बताया है कि Eculizumab नाम की दवा से हर्ष ठीक हो सकता है. उसके परिवार के सामने एक उम्मीद की किरण तो है, लेकिन एक बहुत बड़ी समस्या भी है. दरअसल, Eculizumab दुनिया की सबसे महंगी दवाईयों में शामिल है. अगर हर्ष को ये दवाई मिल जाये, तो उसका अपने परिवार के साथ एक ख़ुशहाल और सामान्य ज़िंदगी जीना संभव हो सकता है.हर्ष का सपना है कि वो एक दिन फ़िल्म निर्देशक बने.

हर्ष की क़िस्मत ने उसके सामने बहुत पहले से चुनौतियां फेंकी और वो एक-एक कर सब पर जीत हासिल करता गया. लेकिन आज उसकी ज़िन्दगी पल-पल उसका साथ छोड़ती जा रही है.

हर्ष को 2009 में डेंगू हुआ था, भोपाल में उसका इलाज हुआ. अच्छे इलाज के बाद भी उसके खून में Platelets और Hemoglobin की मात्रा सामान्य नहीं हो पा रही थी. हालांकि उस वक़्त हालात इतने ख़राब नहीं थे कि उसे ख़ून चढ़ाना पड़े, लेकिन उसी समय से उसका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा था. डॉक्टर्स को लगा कि शायद उसका शरीर पूरी तरह डेंगू के बाद ठीक नहीं हो पाया है. हर्ष के घरवालों ने बॉम्बे कैंसर अस्पताल, CMC अस्पताल समेत सभी बड़े अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन कोई ये नहीं पता लगा पा रहा था कि हर्ष को हुआ क्या है. लखनऊ के सहारा अस्पताल में पता लगा कि उसे Aplastic Anemia है. बीमारी की गंभीरता को देखते हुए उसे पुणे के Sahyadri Hospital भेजा गया. वहां उसे ATG ट्रीटमेंट दिया गया. इसमें घोड़े या ख़रगोश के शरीर से Antibodies लेकर Aplastic Anemia का इलाज किया जाता है. ये ट्रीटमेंट कराने में हर्ष के परिवार को 25 लाख रुपये लगाने पड़े, लेकिन दुर्भायवश ये ट्रीटमेंट असफल हो गया. इसके बाद हर्ष का शरीर Transfusion-Dependent हो गया और उसे ख़ून चढ़ाया जाने लगा.

इतना सब होने के बावजूद हर्ष ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए लड़ते रहने का फैसला किया. उसने 2012 में AIEEE परीक्षा के द्वारा NIT भोपाल में सीट हासिल की. लोग स्वस्थ रह कर भी इतने प्रतिष्ठित संसथान में दाखिला नहीं पा पाते, पर हर्ष ने इतनी गंभीर बीमारी से जूझते हुए भी परिश्रम करना नहीं छोड़ा.

क्लास में वो सबका चहेता था. वो हर कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेता और पूरे उत्साह के साथ अपनी पढ़ाई करता. हर्ष 'नर्मदा' नाम के एक हेल्थ NGO से भी जुड़ा. वो होशंगाबाद के दूर-दराज के गांवों में जाकर उनकी मदद करता था, जिनके पास स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं. सब उसके हौसले को देखते थे, लेकिन शायद ही कोई देख पाता हो कि ऐसी गंभीर बीमारी के साथ जीने के लिए उसे हर दिन कितनी हिम्मत जुटानी पड़ती है.

2015 तक उसकी हालत और ख़राब हो गयी, ये बीमारी धीरे-धीरे उसके हौसले को तोड़ने की कोशिश कर रही थी. 2015 में उसे दिल्ली के B.L. Kapoor अस्पताल में भेज दिया गया. 2016 में उसने NIT में अपना कोर्स ख़त्म कर लिया.

2016 में ही उसका Haplo Bone Marrow ट्रांसप्लांट किया गया. उसकी बहन ने उसे Bone Marrow डोनेट किया. इस ट्रीटमेंट में 35 लाख का ख़र्च आया. इसके बावजूद, ये ट्रीटमेंट सफल नहीं हो पाया. अब उसका शरीर और ज़्यादा Transfusion-Dependent हो चुका था.

2017 दिसंबर में दोबारा उसका Bone Marrow ट्रांसप्लांट किया गया. इस बार उसके पिता ने Bone Marrow डोनेट किया. इस बार उसे फेंफड़ों में गंभीर संक्रमण हो गया, जिसे ठीक करने के लिए उसे दवाईयों की भारी डोज़ दी गयी. इसके इलाज में उसके परिवार को 40 लाख रुपये और लगाने पड़े. उसके शरीर ने नए Cells को नहीं अपनाया, जिससे उसे हाई ब्लड प्रेशर, Red Blood Cell Clotting, TAM (Transplant Associated Microangiopathy) हो गया. उसकी जान अब बहुत ख़तरे में है और डॉक्टर्स ने कहा है कि Eculizumab दवा ही उसे बचा सकती है.

Forbes के अनुसार, Eculizumab दुनिया की सबसे महंगी दवा है और ये केवल USA में उपलब्ध है. अगले महीने उसे ये दवा दी जानी है. इस दवा की एक खुराक की क़ीमत लगभग पांच लाख है. पूरे इलाज में लगभग 65 लाख का ख़र्च आएगा. इसके अलावा Post Transplant Haemophagocystro Syndrome का इलाज भी चलेगा.

अब तक हर्ष के घरवाले इलाज में एक करोड़ ख़र्च कर चुके हैं. उनकी सारी संपत्ति इलाज में लग चुकी है. लेकिन उन्होंने हर्ष के ठीक होने की उम्मीद अभी भी नहीं छोड़ी.

इस वक़्त हर्ष की हालत बेहद नाज़ुक है और उसे मदद की ज़रूरत है. उसे जानने वाले उसके हौसले की दाद देते हैं, लेकिन आज वो लाचार हो चुका है. उसके इलाज के लिए क्राउड फ़ंडिंग से पैसा जुटाया जा रहा है.

हो सकता है कि नेक लोगों की मदद से वो ठीक हो जाये. आप भी कुछ पैसे डोनेट कर के उसकी मदद कर सकते हैं. हमने स्टोरी के नीचे जो लिंक दिया है, उस पर क्लिक कर के आप मदद भेज सकते हैं.

आपकी छोटी सी मदद भी इस वक़्त किसी की ज़िन्दगी बचा सकती है.

Milaap

 

 

More from ScoopWhoop Hindi