इतिहास के पन्ने से: 8 युद्ध जिनकी वजह से हमेशा के लिये बदल गया हिन्दुस्तान का इतिहास

Sanchita Pathak

Battles That Changed The Course Of Indian History. हिन्दुस्तान के इतिहास में एक से एक महायुद्ध लड़े गये. इन संग्रामों का प्रभाव न सिर्फ़ तत्कालीन राजा-प्रजा पर हुआ बल्कि देश के इतिहास का रुख़ भी मुड़ गया. राजाओं के शक्ति-प्रदर्शन, अपना आधिपत्य स्थापित करने की इच्छा ने इतिहास को मिटाया और नया इतिहास बनाया. हड़प्पा से लेकर आर्यों तक तुर्कों से लेकर अफ़गान और फिर अंग्रेज़ों तक भारत ने कई वंशों, शासकों और विदेशियों को अपनी धरती पर बनते, बिगड़ते और मिट्टी में मिल जाते देखा.

राजा पोरस ने 326 BC के आस-पास सिकंदर का डटकर सामना किया लेकिन वो हमारी सीमाओं की रक्षा नहीं कर पाये. चंद्रगुप्त मौर्य, अशोक, समुद्रगुप्त, हर्षवर्धन, पृथ्वीराज चौहान जैसे शासकों ने देश को बाहरी शक्तियों से बचाया.  

आज जानते हैं कुछ ऐसे युद्धों के बारे में जिनकी वजह से भारत के इतिहास का रुख मुड़ गया-  

1. हाईडेस्पीज का युद्ध, 326 ईसा पूर्व 

हाईडेस्पीज का युद्ध (Battle of Hydaspes) राजा पोरस (King Porus) और मेसेडोनिया (Mesopotamia) के सिकंदर (Alexander) बीच झेलम नदी के किनारे लड़ा गया. इस युद्ध को लेकर इतिहासकारों में मतांतर है, पश्चिमी इतिहासकर सिकंदर को विजेता बताते हैं और वहीं एशियन इतिहासकार पोरस को.  

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2. थीरूपुअमबियम का युद्ध, 879 ईस्वी 

थीरूपुअमबियम का युद्ध (Battle of Thirupuambiyam) एक तरफ़ पंड्या (Pandyas) वंश और दूसरी तरफ़ चोल (Cholas), पल्लव (Pallavas) और पश्चिम गंगा वंश (Western Ganga Dynasty) के बीच लड़ा गया. इस युद्ध ने दक्षिण भारत का इतिहास बदल दिया. युद्ध पल्लव और पंड्या के बीच था लेकिन इसका लाभ चोल वंश को भी मिला.  

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3. तराइन का दूसरा युद्ध, 1192 

तराइन का दूसरा युद्ध (The Second Battle Of Tarain) मोहम्मद घोरी (Mohammad Ghori) और पृथवीराज चौहान द्वितीय (Prithiviraj Chauhan) के बीच लड़ा गया. 1191 में तराइन के पहले युद्ध में चौहान ने मोहम्मद घोरी को कड़ी शिकस्त दी. दूसरी बार घोरी दुगनी सेना लेकर आया और राजपूत राजाओं की धोखेबाज़ी की वजह से दिल्ली के आख़िरी हिन्दू राजा को सिंहासन गंवाना पड़ा. इस युद्ध के बाद भारत में ईस्लाम की स्थापना हुई. इससे पहले के इस्लामी शासक भारत को लूटकर चले जाते थे लेकिन घोरी यहीं बस गया.  

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4. पानीपत का पहला युद्ध, 1526 

पानीपत का पहला युद्ध (The First Battle of Panipat) मुग़ल शासक बाबर (Babur) और लोधी वंश के इब्राहिम लोधी (Ibrahim Lodhi) के बीच लड़ा गया. दिल्ली उस समय लोधी के अधीन थी. इस युद्ध में बाबर ने लोधी को बुरी तरह हराया और भारत में मुग़ल साम्राज्य की स्थापना की.  

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5. खानवा का युद्ध, 1527 

खानवा का युद्ध (Battle of Khanwa) मेवाड़ के राजपूत राजा राणा सांगा और बाबर के बीच खानवा गांव के पास हुआ. पानीपत के बाद ये बाबर का दूसरी लड़ाई थी. राणा सांगा. राजपूत सेना युद्ध में हार गई और बाबर का भारत में वर्चस्व बढ़ा.  

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6. प्लासी का युद्ध, 1757 

प्लासी का युद्ध (Battle of Plassey) ने हिन्दुस्तानियों और अंग्रेज़ों के क़िस्मत का फ़ैसला किया. ये लड़ाई सिराज-उद-दौला (Siraj-ud-Daula) और ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) के बीच थी. मीर जाफ़र की धोखेबाज़ी की वजह से सिराज-उद-दौला बंगाल हार गया. इस युद्ध के बाद भारत में अंग्रेज़ों के राज की शुरुआत हुई. 

7. पानीपत का तीसरा युद्ध, 1761 

पानीपत का तीसरा युद्ध (Third Battle of Panipat) मराठाओं और अफ़गानों के बीच लड़ा गया. अफ़गान अहमद शाह अब्दाली (Ahmad Shah Abdali) के पास मराठाओं से कम सेना थी लेकिन मराठा ये युद्ध हार गये. मराठाओं के हार का मुख्य कारण था दूसरे राजाओं का समर्थन न मिलना. राजपूत, सिख, जाट और अवध के नवाब ने भी उनका साथ नहीं दिया. इस युद्ध के बाद अंग्रेज़ों के भारत में घुसने का एक और रास्ता मिल गया. 

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8. बक्सर का युद्ध, 1764 

बक्सर का युद्ध (Battle of Buxar) अंग्रेज़ों और मुग़लों के बीच बक्सर में लड़ा गया. अंग्रेज़ों की तरफ़ से Hector Munro ने सेना की अगवाई कर रहे थे. मुग़ल शासक शाह आलम द्वितीय (Shah Alam II), अवध के नवाब शुजा-उद-दौला, बंगाल के नवाब, मीर क़ासिम की सेना एक साथ मिलकर अंग्रेज़ों का सामना किया. अंग्रेज़ों के पास कम सैन्य बल होने के बावजूद वो ये युद्ध जीत गये. इस युद्ध के बाद Treaty of Allahabad पर हस्ताक्षर किया गया और मुग़ल शासक, अंग्रेज़ों के अधीन आ गया. बक्सर के युद्ध के बाद अंग्रेज़ों का आधिपत्य जम गया. 

Patna Beats

हमने कुछ ही युद्ध इस सूची में शामिल किये हैं लेकिन हर एक युद्ध इतिहास को रुख मोड़ देता है. 

Source- QuoraNational InterestGod of Small Thing

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