जानिये किस मुग़ल शासक की इजाज़त पर अंग्रेज़ों ने भारत में पहली बार कहां रखा था क़दम?

Akanksha Tiwari

हिंदुस्तान क़रीब 200 साल तक अंग्रेज़ों का गुलाम रहा और ये बात सुनकर आज भी मन बेचैन हो जाता है. कितनी अजीब बात है कि हमारे ही देश पर विदेशियों ने पैठ बना कर हमें ही अपना गुलाम बना लिया. दहशत भरे उन दिनों के बारे में सोच कर ही डर लगता है. कभी-कभी सोचते हैं कि आखिर ये अंग्रेज़ हमारे देश में आये कैसे और सबसे पहले इन्होंने भारत के किस हिस्से में क़दम रखा. जहां से इस कहानी की शुरूआत हुई.

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अगर हमारी तरह आपके मन में भी ये सारे सवाल उठते हैं, तो अब इनका जवाब जानने का समय आ गया है. इसकी शुरूआत 1600 के आस-पास ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना के साथ हुई. ये समय था जब गोरों ने हिंदुस्तान में अपने पैर पसारने शुरू कर दिये थे. उस समय हिंदुस्तान पर मुग़ल बादशाह जहांगीर का राज था.  

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किस शहर से अंग्रेज़ों ने व्यापार की शुरुआत की?

ईस्ट इंडिया कंपनी की शुरुआत हो चुकी थी. अंग्रेज़ों ने जहांगीर से इज़ाज़त लेकर 1608 में गुजरात के सूरत शहर में एंट्री ली. लगभग 7 साल बाद ब्रिटिश राजदूत Thomas Roe की देख-रेख में अंग्रज़ों को सूरत में कारखाना जमाने का शाही फरमान मिला. इसके बाद धीरे से ईस्ट इंडिया कंपनी ने मद्रास में भी अपना कारखाना स्थापित कर लिया.

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व्यापार के साथ ही अंग्रेज़ों ने अन्य यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों को खदड़ने के लिये एक कूटनीति बनाई और सफ़ल भी रहे. इसके साथ ही उन्होंने भारत पर भी कब्ज़ा जमा लिया. भारत में रहकर न सिर्फ़ अंग्रज़ों ने चाय, कपास, नील और रेशम के व्यापार का विस्तार किया, बल्कि ब्रिटिश संस्कृति को भी विकसित किया.  

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कहते हैं कि जब Thomas Roe ने जहांगीर को एक नक्शा देते कहा था कि वो उसे दुनिया दे रहा है. पर असल में वो दुनिया दे नहीं रहा था, बल्कि काम से मुग़लों की दुनिया छीन रहा था.  

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सोचिये अगर उस समय अंग्रेज़ों को सूरत न आने दिया जाता, तो इतने सालों हम इनके ग़ुलाम बन कर न रहते.

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