ऐसा क्या हुआ था जो कुंभकर्ण महीनों तक सोता ही रहता था? बेहद रोचक है ये क़िस्सा

Abhay Sinha

Why Kumbhakarna Slept So Much: आपने लोगों को कहते सुना होगा कि ‘बंदूक से निकली गोली और मुंह से निकली बोली, एक बार निकल गई तो वापस नहीं होती.’… जे बात सौ फ़ीसदी सही है. इसलिए बड़े-बूढ़े कहते हैं कि बोलते वक़्त सावधानी रखनी चाहिए. अगर अब तक आप इस बात को नहीं समझे हैं तो आज यक़ीनन समझ जाएंगे, क्योंकि कोई भी अपना हाल कुंभकर्ण (Kumbhakarna) जैसा नहीं होता देखना चाहेगा.

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जी हां, कुंभकर्ण. रावण का वो भाई, जो अपनी दो चीज़ों के लिए रामायण काल से आज तक फ़ेमस है. पहला हचक के खाना और दूसरा बिस्तर से चपक कर सोना. वो भी एक-दो दिन नहीं, बल्क़ि महीनों तक. मगर कभी आपने सोचा है कि आख़िर कुंभकर्ण क्यों इतना ज़्यादा सोता था? (Why Kumbhakarna Slept So Much)

ब्रह्मा जी का भक्त था कुंभकर्ण

कुंभकर्ण हमेशा से इतना ज़्यादा सोता नहीं था. लोककथाओं में उसे पहाड़ जितना विशाल और महापेटू बताया गया है. संत हो या राक्षस उसके रास्ते में आना वाला हर कोई उसका निवाला बन जाता था. मगर फिर भी वो इस कदर सोता नहीं था. उसकी भयंकर नींद के पीछे वजह तो ज़ुबान का फ़िसलना था. 

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दरअसल, एक बार कुंभकर्ण ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की. वो उनसे वरदान चाहता था, तो तपस्या में लगा रहा. कुंभकर्ण अपनी तपस्या में अडिग था. ऐसे में देवताओं के टेंशन हो गई कि आख़िर ये चाहता क्या है! दरअसल, उसका शक्तिशाली भाई रावण पहले ही उपद्रव किए था. ऐसे में अगर कुंभकर्ण भी कोई तगड़ा वरदान पा गया तो पूरा संसार परेशान हो जाएगा. 

मगर देवता भी कुंंभकर्ण की तपस्या भंग नहीं कर पाए. उसकी तपस्या से ब्रह्मा जी भी ख़ुश हो गए और उसे वरदान देने सामने प्रकट हो गए.

Why Kumbhakarna Slept So Much

ज़ुबान फ़िसलने से बिगड़ गया खेल

अब ब्रह्मा जी तो ख़ुश हो गए, मगर भगवान इंद्र को टेंशन हो गई. उन्हें डर था कि कुंभकर्ण ब्रह्माजी से कोई ऐसा वरदान न मांग ले, जो उनके और बाकी देवताओं के लिए परेशानी खड़ी कर दे. वैसे था भी ऐसा ही. कुंभकर्ण को ‘इंद्रासन’ यानि इंद्र की गद्दी चाहिए थी. वो यही मांगने भी वाला था. मगर वरदान मांगते वक़्त उसकी ज़ुबान ऐसी फ़िसली की वो ‘इंद्रासन’ की बजाय ‘निंद्रासन’ (नींद के लिए बिस्तर) मांग बैठा.

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कहते हैं कि ये देवी सरस्वती थीं, जिन्होंने कुंभकर्ण की ज़ुबान से शब्द निकलवाया. क्योंकि, डर था कि अगर कुंभकर्ण देवताओं का राजा बना, तो स्वर्ग को भी नरक बना देगा. बस जब कुंभकरण को ये एहसास हुआ कि उसने ग़लती से ‘निंद्रासन’ मांग लिया है, तो झटका खा गया. मगर तब तक देर हो चुकी थी. क्योंकि, ब्रह्मा जी ने वरदान दे दिया था.

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कहा जाता है कि इसके बाद कुंभकर्ण ने ब्रह्मा से कहा भी कि उसकी जु़बान फ़िसली है. कोई भी अपने होश में शाश्वत नींद नहीं मांगेगा. कहते हैं कि रावण ने भी अनुरोध किया था कि वरदान को वापस ले लें. मगर ब्रह्मा जी वरदान देने के बाद वापस नहीं लेते, तो उन्होंने नहीं लिया.

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