वो पहली Deaf-Blind लड़की थी जिसने ग्रेजुएशन किया, दुनिया उसे Helen Keller के नाम से जानती है

Akanksha Sharma

हेलन केलर यानि, हिम्मत की वो मिसाल, जो इस दुनिया में न उनसे पहले किसी ने कायम की न उनके बाद कोई और कर सका. उनकी ज़िंदगी की मुश्किलों ने उनकी लगन के आगे घुटने टेक दिए. जिन परिस्थितियों की कल्पना कर के हम ख़ौफ से भर जाते हैं, उन परिस्थितियों के साथ हेलन ने अपनी ज़िन्दगी से भी बेहद प्यार किया और दूसरों को भी रास्ता दिखाया.

हेलन ने दृष्टिहीन और बधिर जीवन के लगभग 86 साल बेहद प्यार, लगन और सम्मान से जीये. हेलन की उपलब्धियों और लोकप्रियता ने दुनिया में दिव्यांगों, खासकर दृष्टिहीन, मूक और बधिरों के प्रति लोगों की धारणा ही बदल दी.

Biography

हेलन का जन्म 27 जून 1880 को अलबामा में हुआ था. तब वो नॉर्मल बच्चों की तरह ही थीं. अर्थर केलर और कैथरीन केलर अपनी पहली बच्ची के साथ खुशहाल ज़िंदगी जी रहे थे. लेकिन 19 महीने की उम्र में हेलन को ब्रेन फ़ीवर हुआ.

एक दिन जब हेलन की मां ने डिनर बेल बजाई, तो हेलन ने कोई जवाब नहीं दिया. उसके सामने हाथ हिलाने पर भी हेलन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. डेढ़ साल की हेलन को दिखाई और सुनाई देना बंद हो चुका था.

Biography

हेलन और उनके परिवार के लिए आने वाला वक़्त बेहद कठिन होने वाला था. शुरुआत में तो 19 महीने की ये बच्ची किसी तरह अपनी बात मां को समझा लेती थी, लेकिन जैसे-जैसे वो बड़ी हो रही थी, उसकी परेशानियां बढ़ती गईं. उसकी ज़रूरतें बढ़ने के साथ ही अपनी बात न समझा पाने के कारण हेलन की खीझ भी बढ़ने लगी. वो पागलों जैसा बर्ताव करने लगी. बात-बात पर चिड़चिड़ाने लगी. जब कोई उसकी बात नहीं समझता था, तो वो उछलती, चिल्लाती और सामान पटकने लगती. 19 महीने की उम्र में ही बधिर हो जाने के कारण वो कोई भाषा भी नहीं सीख सकी थी. इसलिए बोलकर अपनी बात समझाने का भी विकल्प नहीं था उसके पास.

धीरे-धीरे हेलन ने अपनी बात समझाने के लिए कुछ Sign विकसित कर लिए. अपने इन्हीं सीमित संकेतों की बदौलत वो सबसे बात कर पाती थी. 7 वर्ष की उम्र तक उनकी अपने घर के कुक की बेटी Martha से अच्छी दोस्ती हो गई थी. लेकिन दृष्टिहीन और बधिर हेलन की ज़िंदगी बेहद मुश्किल होती जा रही थी. कभी-कभी वो अपना सारा गुस्सा अपनी दोस्त Martha पर निकालतीं. चाहे वो खुश हो या फिर गुस्सा, हेलन के बर्ताव को काबू करना मुश्किल हो जाता था.

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लेकिन हेलन के मां-बाप ने इन हालातों से हार नहीं मानी और हेलन को बेहतर से बेहतर शिक्षा देने का फ़ैसला किया. इसके लिए पहले तो वो विशेषज्ञ Dr. J Julian Chisolm से मिलने पहुंचे. Chisolm ने उन्हें Alexender Graham Bell से मिलने की सलाह दी. Graham ने टेलीफ़ोन का आविष्कार किया था और उस वक़्त वो बधिर बच्चों के साथ काम कर रहे थे. Graham ने हेलन के मां-बाप को आशा की किरण दिखाई और उन्हें अपनी बच्ची को Boston के Perkins School For Blinds ले जाने की सलाह दी.

Perkins School में हेलन के लिए Ms. Anne Sullivan को नियुक्त किया गया. 21 वर्ष की Sullivan 3 March, 1887 को हेलन के घर पहुंचीं. यहां से हेलन की ज़िंदगी बदलने की शुरुआत हुई. हेलन वो ‘हेलन केलर’ बनीं, जिन्हें आज दुनिया जानती है. Sullivan और हेलन के रिश्ते ने वो मुकाम हासिल किया, जिसकी दुनिया में दूसरी मिसाल नहीं है.

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हेलन अब तक एक बेहद नखरीली बच्ची थी. वो कभी-कभी तो शांति से Sullivan की बात ध्यान से समझने की कोशिश करती और कभी एकदम उद्दंड हो जाती. Sullivan की पहली चुनौती थी, उसे अनुशासित करना. इसके लिए उन्होंने हेलन को उसके परिवार से दूर रखने की इजाज़त मांगी और हेलन के साथ घर के पास ही एक कॉटेज में रहने लगीं.

अकेले रहकर हेलन को संभालना Sullivan के लिए आसान नहीं था. एक बार खेल-खेल में Sullivan हेलन को एक पेड़ की डाल पर बैठा कर कहीं चली गईं. उनके लौटने से पहले ही तेज़ आंधी आ गई और बारिश होने लगी. डरी-सहमी हेलन के पास डाल से चिपककर Sullivan का इंतज़ार करने के अलावा कोई चारा नहीं था. ये उसके लिए एक बेहद ख़ौफ़नाक अनुभव था.

Sullivan को जब भी किसी वस्तु के बारे में बताना होता, तो वो हेलन की हथेली पर अपनी उंगलियों से उसे लिख देतीं. उन्होंने समझाया कि हर चीज़ का एक नाम होता है. सबसे पहले उन्होंने हेलन को D-o-l-l (Doll) लिखकर बताया और हेलन के लिए लाई हुई एक गुड़िया उसके हाथ में रख दी. हेलन को ये तरीका बहुत अच्छा लगा. अब वो और भी चीज़ों के नाम जानने के लिए उत्सुक हो गई. वो कुछ भी सामान छूती और Sullivan से उसका नाम हथेली पर लिखने के लिए इशारा करती. शुरुआत में Sullivan ने उसे D-O-L-L, M-I-L-K, M-U-G, W-A-T-E-R जैसे शब्द सिखाए. हेलन के लिए W-A-T-E-R बेहद रोमांचक था. Sullivan ने हेलन का हाथ हैंडपंप से निकलते पानी के नीचे रख दिया. इसके बाद उसके हाथ पर WATER लिखा.

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हेलन को इस तरह सीखने में बड़ा मज़ा आ रहा था. अब वो ज़िद़्दी और Frustrated लड़की से एक उत्साहित और Ms. Sullivan की अनुशासित Student बन गई थी. हेलन की ज़िंदगी ने Positive Track पकड़ना शुरू कर दिया. वो हर समय नई-नई चीज़ें सीखने के लिए उत्सुक रहती. Sullivan भी लगन और संयम से उसे हर चीज़ बतातीं. उसे बाहर घुमाने ले जातीं. देख और सुन न सकने वाली ये लड़की, Sullivan की मदद से अब ट्रेन से भी यात्राएं करने लगी थी. रास्ते में पड़ने वाली हर चीज़ के बारे में Sullivan उसे बतातीं. हवा, पानी, धूप, पेड़, पत्तियां, हेलन ने हर उस चीज़ को महसूस किया, जिसकी वो कल्पना भी नहीं कर सकती थीं.

बात करने के लिए हेलन ने धीरे-धीरे ब्रेल, Touch-Lip Reading, Typing और Finger-Spelling सीख ली. हेलन ने Cambridge School for Young Ladies में पढ़ाई की. जैसे-जैसे लोग उनके संघर्ष ते बारे में जानने लगे, हेलन जाने माने लोगों से मिलने लगीं. ऐसे ही उनकी मुलाकात प्रसिद्ध लेखक Mark Twain से हुई. Twain ने उन्हें अपने दोस्त हेनरी रॉजर से मिलाया. हेनरी, हेलन से इतने प्रभावित हुए कि वो हेलन के Radcliffe College में पढ़ने का खर्च उठाने को तैयार हो गए. Radcliffe में हर लेक्चर के दौरान Sullivan उनके साथ बैठतीं और उनके लिए Interpret करतीं. इस तरह पढ़ाई करना हेलन के लिए बेहद मुश्किल था. इन सब कठिनाइयों से लड़ते हुए हेलन ने 1904 में Graduation पूरा किया. इसी दौरान उन्होंने Ms. Sullivan और उनके होने वाले पति John Macy की मदद से अपनी आत्मकथा ‘The Story of My Life’ लिखी.

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पढ़ाई पूरी करने के बाद वो सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठाने लगीं. वो न सिर्फ़ Disability, बल्कि महिला सशक्तिकरण, परिवार नियोजन, युद्ध-शांति जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखती थीं. 1915 में उन्होंने ‘हेलन केलर इंटरनेशनल’ संस्था की स्थापना की जो Blindness और कुपोषण के शिकार लोगों के लिए काम करती है.

1932 में हेलन की ज़िंदगी में भयंकर भूचाल आया. उनकी टीचर Sullivan की आंखों की रौशनी पूरी तरह चली गई और इसके 4 साल बाद, 1936 में वो अपनी प्यारी हेलन को छोड़कर दुनिया से चली गईं. लेकिन, इतने सालों में वो हेलन को इतना सक्षम बना कर गईं कि उन्हें अकेले अब कोई दिक्कत नहीं होने वाली थी. एक टीचर अगर अपनी शिद्दत पर आ जाए, तो अपने Student को वो क्या से क्या बना सकता है, इसकी मिसाल रहीं Anne Sullivan.

1946 में हेलन केलर को American Foundation of Overseas Blind का Counselor नियुक्त किया गया.1946 से 1957 के बीच उन्होंने 35 देशों की यात्रा की.

हेलन एक प्रसिद्ध लेखिका थीं और अच्छी वक्ता भी. कई बड़े संस्थान उन्हें अपने अनुभवों के बारे में बताने के लिए बुलाते थे. हेलन ने कई किताबें लिखीं. इनमें ‘The Story of my life’, ‘Teacher’, ‘The World I live in’, और ‘Out of the Dark’ काफ़ी प्रसिद्ध हैं. इसके अलावा उन्होंने कई लेख भी लिखे हैं.

हेलन की बायोग्राफ़ी से प्रभावित होकर कई नाटक, टीवी सीरियल और फ़िल्में भी बनाई गई हैं. भारत में भी 2005 में आई ‘Black’ फ़िल्म हेलन की ज़िंदगी से ही प्रभावित है. इस फ़िल्म में रानी मुखर्जी ने एक दृष्टिहीन-बधिर लड़की का किदार निभाया है और अमिताभ बच्चन ने उसके टीचर का.

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1 जून 1968 को जब हेलन ने सोने के लिए आंखें बंद की, तो दोबारा कभी नहीं खोलीं. अपने आखिरी दिनों में हेलन अपने घर में ही रहती थीं.

पूरी दुनिया के लिए हेलन केलर हिम्मत की मिसाल हैं. Graduation पूरा करने वाली वो दुनिया की पहली दृष्टिहीन-बधिर इंसान हैं. होश संभालने के बाद उन्होंने कभी दुनिया देखी नहीं, कभी कुछ सुना नहीं, लेकिन, Sullivan के ‘W-A-T-E-R’ के जादू के बाद हेलन ने ज़िन्दगी को भरपूर जिया. उन्होंने प्रकृति को पूरी तरह महसूस किया. दुनिया के कई देश घूमे, किताबें लिखीं और दुनिया को ‘हेलन केलर’ नाम से जीजिविषा का एक प्रतीक दे गईं.

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