जहां बताया महादेव ने पार्वती को अमरता का रहस्य, वो पवित्र अमरनाथ गुफ़ा खोजी थी एक मुसलमान ने

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सावन के महीने में धरती एक दुल्हन की तरह सज-सवंर जाती है. इस काल में यह अपने बदन पर हरियाली की चुनरी ओढ़कर इठला रही होती है. अब इस महीने में देवों के देव महादेव का ज़िक्र ना हो तो यह अप्रतिम महिना अधूरा-सा लगता है. शास्त्रों में तो यहां तक लिखा है कि इस महीने में महादेव, मां पार्वती के साथ भ्रमण पर निकलते हैं. हमारे देश में इसी दौरान एक धार्मिक घटना और होती है जिसे अमरनाथ यात्रा के नाम से जाना जाता है. तो आज हम आपको इसी पवित्र गुफ़ा से जुड़े कुछ अनजान तथ्य बताते हैं, जिन्हें सुनकर आप भी भक्तिमय और रहस्यमय माहौल में रम जायेंगे.

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अमरनाथ हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है. यह जम्मू कश्मीर की राजधानी, श्रीनगर के उत्तर-पूर्व में 13,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. इस गुफा की लम्बाई (अन्दर की तरफ गहराई) 19 मीटर है और चौड़ाई 16 मीटर है. यह गुफा 11 मीटर ऊंची है और भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में सबसे प्रमुख है. अमरनाथ को तीर्थों का राजा भी कहा जाता है. यहां पर भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था. जिसे अमरगाथा के रूप में जाना जाता है.

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इस गुफ़ा की विशेषता इसके अन्दर अपने आप प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग है. अपने आप बनने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहा जाता है. आषाढ़ पूर्णिमा से लेकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन के महीने में यहां लाखों लोग दर्शन को आते हैं.

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इस गुफ़ा में मां पार्वती को अमरता का ज्ञान देते समय सद्दोजात शुक-शिशु शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हो गये थे. गुफ़ा में आज भी कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई दे जाता है, जिन्हें अमर पक्षी माना जाता है, जो कि अमरकथा सुनकर अमर हो गये थे. ऐसा माना जाता है कि जिन्हें भी यह पक्षी दिख जाते हैं, वे मुक्ति को प्राप्त होते हैं. इसी अमरकथा में शिव जी ने मां पार्वती को अमरनाथ पर पहुंचने के मार्ग के बारे में भी बताया था.

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कुछ लोग मानते हैं कि जब शिव पार्वती को कथा सुना रहे थे तब उन्होंने अनंत नागों को ‘अनंतनाग’ में छोड़ा था. अपने माथे के चन्दन को ‘चन्दनबाड़ी’ में उतारा, अन्य पिस्सुओं को ‘पिस्सू टॉप’ पर और गले के के शेषनाग को ‘शेषनाग’ नामक स्थल पर छोड़ा था. यह सभी जगह आज भी अमरनाथ यात्रा के मार्ग में आती हैं.

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इस पवित्र गुफ़ा का पता सबसे पहले 16वीं सदी में एक मुसलमान गडरिए को चला था. आज भी चढ़ावे का एक हिस्सा उस मुसलमान गडरिए के वंशजों को मिलता है. यहां इसके अलावा और भी पवित्र गुफ़ाएं हैं. भारत आस्था का केंद्र माना जाता है. आस्था को आधार मनुष्य की श्रद्धा से मिलता है. अगर आप भी एक सच्चे श्रद्धावान हैं, तो अपने घर पर ही इस पावन महीने में बैठ कर महादेव का स्मरण करके इस गुफ़ा के अलौकिक दर्शन करके प्रभु को याद कर लीजिए. वैसे भी कहा गया है,’मन चंगा तो कठोती में गंगा’.

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