परमाणु हमला, भूकंप, सुनामी, सब झेलकर भी जापानियों ने ऐसी तरक्की की, जिसे दुनिया सलाम करती है

Smita Singh

द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने वाला था और जापान हथियार डालने की कगार पर पहुंच चुका था. लेकिन तभी मानव इतिहास में पहली बार सिर्फ़ अपनी ताक़त दिखने के मकसद से मासूम लोगों पर परमाणु हमला किया गया. अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर 6 अगस्त को और नागासाकी पर 9 अगस्त को परमाणु बम गिरा दिया. बम गिरने के कुछ ही पलों के भीतर वहां ऐसा विनाश मचा, जिसकी कोई मिसाल नहीं है. हमले में एक लाख से ज्यादा लोग मारे गए. बम का असर इतना भयावह था कि आज दशकों बाद भी यहां कई बच्चे विकलांग पैदा होते हैं.

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वो भी वक्त था, जब द्वितीय विश्व युद्ध और मनुष्यता का ‘क्रूरतम हमला’ (परमाणु हमला) झेलने वाला जापान लगभग तबाह हो चुका था. 1945 में हुए इस परमाणु हमले ने न केवल जापान को झुकने के लिए मजबूर कर दिया था, बल्कि इसकी इकॉनमी भी तबाह हो गई थी, पर जापानियों ने हार नहीं मानी. 

दुनिया ने सोचा कि जापान की कई पीढ़ियां परमाणु हमले में जले लोगों के कंकालों का खौफ़ सदियों तक नहीं भुला पाएंगी और उसकी तकदीर का फ़ैसला मलबों में दबी लाशों के बीच मुल्क में पसरा सन्नाटा करेगा.

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लेकिन यह मुल्क अपने मुकद्दर के लिए कुदरत से लड़ा और एटम बम जैसी इंसानी त्रासदी से भी. आज जापानी अर्थव्यवस्था दुनिया के लिए एक मिसाल है. 

जापान आज दुनिया के तमाम देशों से बहुत आगे है. इतिहास गवाह है कि जितनी बड़ी त्रासदी से ये देश दो-चार हुआ है, उतनी ही ऊंचाई को इसने छुआ है.

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-109 जागृत ज्वालामुखियों बीच स्थित यह देश प्राकृतिक रूप से सर्वाधिक संवेदनशील है. यह ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है, जिस वजह से सबसे ज्यादा जागृत ज्वालामुखी यहां हैं.

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-ज्वालामुखी के कारण यहां सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं. 1923 में टोकियो में आए भूकंप में लगभग डेढ़ लाख लोग मारे गए थे.

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-जापान पर सबसे ज्यादा खतरा सुनामी का होता है. 2013 में आई सुनामी ने जापान के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को क्षतिग्रस्त कर दिया था. इससे निकले रेडिएशन से सैकड़ों लोग मारे गए थे. 

ऊंचाइयां छूता जापान

-जापानी टेक्नॉलजी के सामने दुनिया में कोई खड़ा नहीं हो सकता. इसी के दम पर इस देश ने दुनिया में अपन ख़ास मुकाम बनाया है.

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-दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बनाने में जहां टेक्नॉलजी का योगदान है, वहीं साइंस के क्षेत्र में इस देश के वैज्ञानिकों ने 13 बार फिजिक्स का नोबल पुरस्कार जीतकर अपनी काबिलियत साबित की है.

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-यहां की प्रति व्यक्ति सालाना आय 50 हजार डॉलर है, जो यह बताने के लिए काफी है कि लोग कितने खुशहाल हैं.

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-रोबोट बनाने में जापान नंबर वन है. दुनिया में इस्तेमाल किए जाने वाले रोबॉट्स में से 50 फीसदी खुद जापान में इस्तेमाल हो जाते हैं.

-जापान में अनुवाद को काफी गंभीरता से लिया जाता है और पूरी दुनिया का साहित्य अनुवाद के माध्यम से जापानियों को उपलब्ध है.

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-चाहे रेलवे हो या सड़क, जलमार्ग हो या वायुमार्ग, हर मामले में यहां की क्वॉलिटी जबरदस्त है. भारत में पहली ट्रेन 1853 में चली थी, जबकि जापान में 1872 में यानि 19 साल बाद. फिर भी दुनिया को बुलेट ट्रेन से परिचित कराने वाला जापान ही है.

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जापान ने आज आश्चर्यजनक रूप से प्रगति की है और खुद को विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में खड़ा किया है. दुनिया में पहली बार पर,मनु बम की त्रासदी झेलने वाले इस देश ने पूरे विश्व के सामने विकास का एक अनोखा उदाहरण पेश किया है. जापान ने जान लिया है कि शान्ति व प्रेम का रास्ता ही सबसे अच्छा और मानवीय है. ये वो देश है, जिससे दुनिया के तमाम देशों को सीख लेनी चाहिए. 

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