सावन में भगवान शिव पर बेल पत्र, धतूरा और दूध-दही अर्पित करने के पीछे हैं ये वैज्ञानिक तथ्य

Kratika Nigam

हरे-हरे लहलहाते पेड़, बारिश की बौछारें, झूला-झूलते बच्चे, हरी-हरी चूड़ियों के ठेले पर लड़कियों की भीड़ और राखी की ख़ुशी ये है सावन की पहचान. इसके अलावा सावन के सोमवार का भी महत्व होता है. लोग सोमवार को व्रत करते हैं. इस दौरान शिवजी को बेल पत्र, धतूरा, दूध और दही चढ़ाते हैं. लोगों का मानना है कि शिवजी इन चीज़ों से प्रसन्न होते हैं. ये लोगों की श्रद्धा है पर क्या आपको पता है कि आपके द्वारा चढ़ाए जाने वाली ये सब चीज़ों के पीछे कुछ और भी कारण हैं.

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पौराणिक कथाओं में ज़िक्र है कि भगवान शिव ने इस पृथ्वी की रक्षा करने के लिए विष पी लिया था. ठीक उसी तरह से इस पृथ्वी पर जो भी चीज़ें इंसानों के लिए हानिकारक हैं या उनका कोई उपयोग नहीं है उन्हें सावन में शिव जी को अर्पण कर दिया जाता है. 

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जिन चीज़ों को लोग भक्ति भाव मानकर सदियों से करते आ रहे हैं, आज उनके पीछे के कुछ Facts हम आपको बताएंगे. 

1. धतूरा

धतूरे की पैदावार बरसात के मौसम में ज़्यादा होती है. इसका औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है, लेकिन बचे हुए धतूरे को भगवान शिव पर चढ़ा देते हैं ताकि इसके ज़हर से जानवरों को या किसी इंसान को कोई नुकसान न पहुंचे. 

2. बेल पत्र 

बेल पत्र की खेती सबसे ज़्यादा मई और जून में होती है. तब तक ये औषधि के रूप में काम आती है. मगर एक बार बारिश होने के बाद इसका आयुर्वेद में कोई उपयोग नहीं होता है. इसलिए इसे सावन के सोमवार में शिवजी पर चढ़ा देते हैं.

3. दूध और दही

सावन में दूध न पीने की सलाह आयुर्वेद में दी गई है. दरअसल इस मौसम में बारिश होती है जिससे कीड़े-मकोड़े पनपते हैं. ऐसे में जब गाय सड़क पर पड़ा सामान या घास खाती है तो वो कीड़े-मकोड़े भी खा जाती है. इससे उसका दूध हानिकारक हो जाता है, जिससे पेट से जुड़ी समस्याएं होने का ख़तरा होता है. इसी कारण सावन में दूध नहीं पिया जाता है और शिव जी पर चढ़ाया जाता है. 

आपकी भावनाओं पर हमारा कटाक्ष नहीं, बल्कि इससे जुड़े Facts हैं. 

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