ज़िन्दगी के हर पल को बहादुरी और वीरता के साथ जिया था ‘मैसूर के शेर’ टीपू सुल्तान ने

Sanchita Pathak

सुल्तान फ़तेह अली टीपू, मैसूर के शेर, एक ऐसे शासक थे जो अंग्रज़ों की ईस्ट इंडिया कंपनी का कड़ा विरोध करते थे. विदेशियों ने जब दक्षिण को अपनी मुट्ठी में करना चाहा, तब अंग्रेज़ों को टीपू सुल्तान ने ही कड़ी टक्कर दी थी. इंग्लैंडवासी और आज के भी कुछ बुद्धिजीवी सुल्तान को एक तानाशाह ही मानते है. वहीं कुछ इतिहासकार ऐसे भी हैं, जिनकी नज़र में सुल्तान एक क्रांतिकारी हैं.

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टीपू सुल्तान का नाम फथ अली रखा गया था, पर उन्होंने ख़ुद ही अपना नाम फ़कीर टीपू मस्तान औलिया के नाम पर रखा.

छोटा कद, बड़ी-बड़ी मूंछे और तीखे नयन-नख्श वाले सुल्तान एक मुस्लमान शासक थे, जिनके राज्य की जनसंख्या में हिन्दू ही अधिक थे और मुस्लमान काफ़ी कम. टीपू को मैसूर की गद्दी अपने पिता हैदर अली से विरासत में मिली. हैदर अली ने पुराने हिन्दू राजा से राज हथियाकर एक मुस्लिम राज स्थापित किया था.

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टीपू सुल्तान की ज़िन्दगी से जुड़ी कुछ खास बातें:

टीपू सुल्तान को बाघों से विशेष लगाव था. श्रीरंगपट्टनम स्थित अपने महल में उन्होंने 6 बाघ पालकर रखे थे. उनकी राजगद्दी भी बाघ के आकार और बाघ के शरीर जैसी ही बनाई गई थी. उनकी सेना के सबसे उम्दा लड़ाके भी बाघ के चिन्ह के बाजुबंद पहनते थे.

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बचपन में टीपू का प्रिय खिलौना, एक बाघ जो एक अंग्रेज़ की गर्दन मरोड़ रहा था. टीपू सुल्तान की तलवार के हत्थे पर भी एक दहाड़ता हुआ बाघ बना हुआ था. अंग्रेज़ों ने टीपू की तलवार को अपने कब्ज़े में कर लिया था और इंग्लैंड ले गए थे. ‘King of Bad Times’ विजय माल्या के पास है. माल्या ने एक नीलामी में टीपू की तलवार खरीदी थी.

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आज भारत अंतरिक्ष की गहराईयों को छू रहा है. भारत में रॉकेट तकनीक लाने का श्रेय टीपू सुल्तान को ही जाता है. सुल्तान के रॉकेट से तलवारें भी निकलती थी. सुल्तान की ही तकनीक पर फ्रांसीसियों ने पहला रॉकेट बनाया था.

टीपू सुल्तान ने कई हिन्दुओं और क्रिस्तानियों का धर्म परिवर्तन भी करवाया था. जिन लोगों ने धर्म परिवर्तन करने से इंकार कर दिया था, सुल्तान ने उन्हें मौत के घाट उतरवा दिया था. सुल्तान ने अंग्रेज़ों से दक्षिण को बचाया था, पर उन्होंने कई मंदिर और चर्च नष्ट करवा दिए थे.

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दक्षिण भारत में कई सालों तक अंग्रेज़ पांव जमाने में असफ़ल रहे थे. सुल्तान ने दक्षिण को अंग्रेज़ों से बचाया था और ‘टिप्पु साहब’ कहलाए थे.

नेपोलियन बोनापार्ट भी था, टीपू सुल्तान का कायल. हम हिन्दुस्तानी थे ही इतने कमाल के. सिकंदर से लेकर नेपोलियन तक सभी भारतीयों का लोहा मानते थे. नेपोलियन और टीपू के दुश्मन एक ही थे और नेपोलियन भारतीय राजाओं के साथ दोस्ताना कायम करना चाहते थे. पर न नेपोलियन जीत पाए और न टीपू.

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टीपू एक कट्टर मुसलमान थे, पर अंधविश्वासी थे और अपना भाग्य दिखाने हिन्दू पंडितों के पास जाते थे. टीपू सुल्तान ने अपने दरबार में कुछ ब्राहम्ण पंडितों को भविष्य जानने के लिए रखा था.

सुल्तान को तलवारों के साथ ही किताबों का भी शौक था. टीपू सुल्तान की लाइब्रेरी हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी लाइब्रेरी थी. हालांकि, ज़्यादातर किताबें अंग्रेज़ ले गए.

टीपू सुल्तान को हीरे जवाहरातों का ज़्यादा शौक नहीं था. उन्होंने पहली बार सोने का बकलस पहना था और वही उनकी मौत का कारण भी बना.

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टीपू हमेशा अकेले ही नहाते थे, उन्हें किसी के सामने नहाना पसंद नहीं था. पुराने राजा-रजवाड़े शाही हमाम में स्नान करते थे, पर सुल्तान को ये ताम-झाम नापसंद था.

टीपू सुल्तान को बागवानी का भी बहुत शौक था. लालबाग बोटेनिकल गार्डन इस बात का सुबूत है.

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टीपू सुल्तान के बारे में अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय हैं. पर वे अपने समय के सबसे ताकतवर शासक थे. 

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