मीर उस्मान अली ख़ान: भारत का सबसे अमीर निज़ाम, जो टिन की प्लेट में खाना खाता था

Kratika Nigam

Mir Osman Ali Khan: जब सबसे अमीर व्यक्तियों की बात आती है तो सबसे पहले दिमाग़ में बिज़नेसमैन टाटा, बिड़ला, महिंद्रा और अंबानी का नाम आता है क्योंकि ये सभी इतने अमीर हैं कि इनकी सात पुश्तें भी बैठकर खाएं तो इनका पैसा ख़त्म नहीं होगा, लेकिन इतिहास के पन्नों को पलटोगे तो जानोगे कि ये लोग सबसे अमीर व्यक्ति नहीं हैं, इनसे पहले भी कई राजा-महाराजा हुए जो संपत्ति के मामले में करोड़ों-अरबों रुपये के मालिक थे, इन्हीं में से एक हैं हैदराबाद के निज़ाम, मीर उस्मान अली ख़ान (Mir Osman Ali Khan).

wikimedia

ये भी पढ़ें: Robert Wadlow: इतिहास का सबसे लंबा आदमी, जिसकी लंबाई ही बन गई उसकी मौत की वजह

हालांकि, आज़ादी के बाद भारत एक लोकतांत्रिक देश बन गया जिसके चलते कई राजाओं को अपनी रियासत का विलय करना पड़ा और उनकी संपत्ति उनसे ले ली गई, लेकिन मीर उस्मान अली ख़ान आज़ादी के बाद भी अमीर रहे. इन्होंने साल 1948 में अपनी रियासत का भारतीय लोकतंत्र में विलय कर दिया था. आज हम आपको बताएंगे कि चार दशकों तक शासन करने वाले निज़ाम मीर उस्मान के पास कितनी संपत्ति थी.

tosshub

कब से कब तक किया शासन?

दक्कन के पठार में स्थित हैदराबाद रियासत के सांतवें निज़ाम थे, ‘निज़ाम उस्मान अली ख़ान’ था. नवाब उस्मान अली ख़ान (Mir Osman Ali Khan) का जन्म 6 अप्रैल, 1886 को हैदराबाद में हुआ था. नवाब साहब का पूरा नाम ‘मीर असद अली ख़ान निज़ाम उल मुल्क़ ‘आसफ़ जाह सप्तम’ था. निज़ामशाही के तौर पर मीर उस्मान का शासन 31 जुलाई, 1720 को शुरू हुआ था. इसकी नींव मीर कमारुद्दीन ख़ान ने रखी थी. उस्मान अली ख़ान आसफ़जाही राजवंश के आख़िरी निज़ाम थे. उस्मान अली ख़ान का राज्याभिषेक 18 सितम्बर 1911 को हुआ था और उन्होंने 1948 तक शासन किया था. इस तरह नवाब ने कुल 37 साल शासन किया था.

medium

निज़ाम को एक बहुत ही कुशल प्रशासक थे, लेकिन वो बहुत कंजूस भी थे. अरबों की संपत्ति के मालिक निज़ाम टिन की प्लेट में खाते थे और उन्होंने एक टोपी को 35 साल तक पहना था. इसके अलावा, वो कभी प्रेस किए कपड़े नहीं पहनते थे. इतना ही नहीं, उन्होंने कभी महंगी सिगरेट नहीं पी वो सस्ती सिगरेट पीते थे यहां तक कि कभी-कभी मेहमानों से मांगकर पीते थे. कहते हैं, कि निज़ाम ने कभी भी सिगरेट का पूरा पैकेट नहीं ख़रीदा. इतने कंजूस होने पर भी वो पेपरवेट के लिए 20 करोड़ डॉलर (1340 करोड़ रुपये) की क़ीमत वाले हीरे का इस्तेमाल करते थे. निजाम को प्रजा ‘निज़ाम सरकार’ और ‘हुज़ूर-ए-निज़ाम’ जैसे नाम से बुलाती थी.

theprint

ये भी पढ़ें: मैरी ऐन बेवन: दुनिया की सबसे बदसूरत महिला, जिसने परिवार के लिए इस ख़िताब को जीता

ब्रिटिश न्यूज़पेपर ‘द इंडिपेंडेन्ट’ की के अनुसार, हैदराबाद के निज़ाम मीर उसमान अली ख़ान की कुल संपत्ति 236 अरब डॉलर आंकी गई थी. नवाब ने 1918 में उस्मानिया विश्वविद्यालय के साथ-साथ उस्मानिया जनरल अस्पताल, स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद, बेग़मपेट एयरपोर्ट और हैदराबाद हाईकोर्ट सहित कई सार्वजनिक संस्थानों की स्थापना की थी. इसके अलावा, निजाम ने 1965 में चीन से भारत के युद्ध के दौरान भारत सरकार को पांच टन यानि 5 हज़ार किलो सोना नेशनल डिफ़ेंस फ़ंड में दिया था. आज इस सोने की क़ीमत लगभग 16 सौ करोड़ रुपये से ज़्यादा है.

wikimedia

आपको बता दें, वित्तीय सुधारों को बढ़ावा देते हुए हैदराबाद रियासत को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने के लिए रियासत ने अपनी मुद्रा और सिक्के जारी किए और एक प्रमुख रेल कंपनी का स्वामित्व ग्रहण किया. इसके अलावा, द्वितीय विश्वयुद्ध में उनकी रियासत ने नौसैनिक जहाज़ और दो रॉयल एयरफ़ोर्स स्क्वाड्रन भी पहुंचाएं. इसके चलते, 1946 में उन्हें रॉयल विक्टोरिया चेन से सम्मानित किया गया.

twimg

आज़ाद भारत में मीर उस्मान (Mir Osman Ali Khan) ने 26 जनवरी 1950 से 31 अक्टूबर 1956 तक राजप्रमुख पद के कार्यभार को संभाला क्योंकि जब बारत आज़ाद हुआ तो निज़ाम को नवाबी छोड़नी पड़ी, जिसके चलते उन्हें अपनी रियासत को भारतीय गणतंत्र में 1948 को शामिल करना पड़ा. रिकार्ड्स के अनुसार, निज़ाम की नवाबी चली जाने के बाद भी उनकी 9 पत्नियां, 42 Keeps, 200 बच्चे और 300 नौकर थे.

आपको ये भी पसंद आएगा
कोलकाता में मौजूद British Era के Pice Hotels, जहां आज भी मिलता है 3 रुपये में भरपेट भोजन
जब नहीं थीं बर्फ़ की मशीनें, उस ज़माने में ड्रिंक्स में कैसे Ice Cubes मिलाते थे राजा-महाराजा?
कहानी युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस की, जो बेख़ौफ़ हाथ में गीता लिए चढ़ गया फांसी की वेदी पर
बाबा रामदेव से पहले इस योग गुरु का था भारत की सत्ता में बोलबाला, इंदिरा गांधी भी थी इनकी अनुयायी
क्या है रायसीना हिल्स का इतिहास, जानिए कैसे लोगों को बेघर कर बनाया गया था वायसराय हाउस
मिलिए दुनिया के सबसे अमीर भारतीय बिज़नेसमैन से, जो मुगलों और अंग्रेज़ों को देता था लोन