हरीसा: सर्दियों में बनने वाली कई शताब्दी पुरानी ख़ास कश्मीरी डिश, बनने में लगते हैं 14-16 घंटे

Nripendra

Winter Kashmiri Dish Harissa in Hindi: लज़ीज व्यंजनों का नाम आते ही कश्मीर का ज़िक्र करना लाज़मी हो जाता है. कश्मीर अपने मनमोहक प्राकृतिक नज़ारों के अलावा अपने ज़ायकेदार व्यंजनों के लिए भी विश्व भर में प्रसिद्ध है. यहां आने वाले टूरिस्ट यहां के नॉनवेज़ फ़ूड्स के दिवाने हैं. 

कश्मीरी क्यूज़ीन पर नज़र डालें, तो पता लगेगा कि यहां बनने वाली कई नॉन वेज़ डिश कई शताब्दी पुरानी हैं और बहुत-सी डिश बाहर से आकर कश्मीर का हिस्सा बनीं. इनमें एक नाम हरीसा का भी आता है, जिसे ख़ास सर्दियों में ही बनाया जाता है. वहीं, इससे बनने में एक या दो घंटे नहीं बल्कि 14 से 16 घंटे लग जाते हैं. 

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आइये, जानते हैं क्या है हरीसा (Winter Kashmiri Dish Harissa in Hindi) डिश और क्या है इसका इतिहास (History of Harissa in Hindi) और कैसे हरीसा तैयार किया जाता है.  

क्या है हरीसा? 

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Winter Kashmiri Dish Harissa in Hindi: कश्मीरी हरीसा मूल रूप से एक पारंपरिक मटन करी रेसिपी है, जिसे आमतौर पर सर्दियों के दौरान खाया जाता है. इसे कश्मीरी ब्रेड (Kashmiri Tchot) के साथ खाना सबसे अच्छा माना जाता है. 

इलायची, दालचीनी जैसे साबुत मसालों के साथ मलाईदार दूध और चावल का पेस्ट शामिल करने से इस रेसिपी का स्वाद लाजवाब हो जाता है. 

कहां से आया ये हरीसा? 

History of Harissa in Hindi: Freepresskashmir की मानें, तो इसकी उत्पत्ति मध्य एशिया में हुई थी और ये कश्मीर में इसका आगमन मुग़ल युग के दौरान हुआ था, जो अब कश्मीर की एक ख़ास डिश बन चुकी है.  

वहीं, कश्मीर के मुहम्मद सुहैब नाम के हरीसा विक्रेता का मानना है कि 14 वीं शताब्दी में फ़ारसी सूफ़ी विद्वान मीर सैयद अली हमदानी के आगमन के साथ हरीसा पहली बार कश्मीर में पेश किया गया था.

क्यों खाया जाता है सर्दियों में? 

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Winter Kashmiri Dish Harissa in Hindi: सर्दियां आने तक इस ख़ाश डिश का इंतज़ार किया जाता है. जैसा कि हमने ऊपर बताया कि ये एक मटन डिश है, जिसमें तरह-तरह के गर्म मसालों का प्रयोग किया जाता है. सर्दियों में हाड़ कंपा देने वाली ठंड से ख़ुद को बचाने के लिए इस डिश का सेवन किया जाता है. 

इसे सुबह नाश्ते में खाया जाता है और वो भी कश्मीरी ब्रेड के साथ. इसे घर पर भी बनाया जाता है और कश्मीर के कई पुराने होटलों में इस पारंपरिक डिश को बनाने का काम किया जाता है. 

बनने में लगते हैं 14 से 16 घंटे 

ये कोई आम डिश नहीं है, क्योंकि इससे बनने में एक या दो नहीं बल्कि 14 से 16 घंटे का वक़्त लग जाता है. जैसे मान लो आज दोपहर 2 बजे इससे बनाना शुरू किया, तो ये अलगे दिन सुबह 5-6 बजे तक तैयार हो जाती है. इसे बनाने का काफ़ी लंबा प्रोसेस होता है. 

कैस बनता है ये हरीसा?

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Winter Kashmiri Dish Harissa in Hindi: सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में मीट को तब तक हल्की आंच में पकाया (Process of Making Harissa in Hindi) जाता है, जब तक कि मीट हड्डियों से अलग न हो जाए और आसानी से मसलने लायक न हो जाए. 

इसके बाद मीट से हड्डियों को निकाल दिया जाता है, जो कि एक बड़ा टास्क है. अगर हड्डी का एक भी छोटा टूकड़ा छूट जाता है, तो पूरी डिश खराब हो सकती है. 

इसके बाद एक अन्य मिट्टी के बर्तन में धीमी आंच पर पकाए (Process of Making Harissa in Hindi) गए चावल को नरम मटन के साथ डाला जाता है. पके हुए मटन और चावल के साथ लौंग, इलायची और सौंफ़ जैसे मसालों का मिश्रण मिलाया जाता है. मिश्रण को फिर एक बड़े तांबे के बर्तन में डालकर तब तक लगातार कूटा जाता है जब तक कि यह पेस्ट में न बदल जाए. वहीं, बनने के बाद इसे ब्रेड के साथ सर्व किया जाता है. कश्मीर जाएं, तो इस लाजवाब डिश का आनंद ज़रूर उठाएं.

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