हर साल बारिश में डूब जाता है दिल्ली का मिंटो ब्रिज, सरकारों की लापरवाही का नतीजा

Abhay Sinha

दिल्लीवालों का मिंटो ब्रिज को अब संत ब्रिज बुलाना शुरू कर देना चाहिए. काहे कि ये इतनी बार जल समाधि ले चुका है कि दुनिया में ऐसी मिसाल शायद ही मिले. 1933 में बने इस पुल का नाम भारत के सन् 1905-1910 के बीच वायसराय रहे लॉर्ड मिंटो के नाम पर रखा गया था.   

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इस पुल को बने एक अरसा गुज़र गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. इधर बारिश हुई नहीं और उधर ब्रिज गायब. सरकारें आती गईं, जाती गईं लेकिन मिंटों ब्रिज का पुरसाहाल लेने वाला कोई नहीं हुआ. हालांकि, कागज़ों पर इस ब्रिज को शिवाजी ब्रिज के नाम से जाना जाता है, लेकिन दिल्लीवालों के लिए ये अभी मिंटो ब्रिज ही है.   

ख़ैर, एक ज़माना था जब ये पुल बढ़ते इंडिया की हज़ारों ख़वाहिशों को ख़ुद में समेटे रहता था. लाल ईंटों से बना मिंटो ब्रिज लंबे समय तक बड़ी कंपनियों को अपने उत्पादों का प्रचार करने के लिहाज से सबसे मुफ़ीद स्थान रहा. हालांकि, बाद में दुसरे पुल इस विज्ञापनों के लिए ज़्यादा उपयुक्त बन गए. फिर चाहें तिलक ब्रिज हो, जो मिंटो ब्रिज के साथ ही बना था या फिर 1982 में राजधानी में आयोजित एशियाई खेलों के दौरान रंजीत सिंह फ़्लाइओवर हो. इन सबके सामने मिंटो ब्रिज का महत्व कुछ कम हो गया.  

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सरकार की नज़रों में शायद मिंटो ब्रिज देश के अन्य पुल की तरह ही हो सकता है, लेकिन इससे गुज़रने वालों के लिए ये अनगिनत यादों का पिटारा है. ‘तमस’ के लेखक भीष्म साहनी को कोई कैसे भूल सकता है. साहनी अजमेरी गेट स्थित ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पैदल ही कनॉट प्लेस के कॉफी हाउस में मिंटो ब्रिज को पार करते हुए आते-जाते थे. इतना ही नहीं, ये पुल हिंदी के दो वरिष्ठ कथाकारों की मुलाकात और गपशप का भी गवाह है. दरअसल, इसी पुल पर साहनी को कई बार अवारा मसीहा के रचयिता विष्णु प्रभाकर का साथ भी मिल जाया करता था. फिर कई बार भुट्टे के साथ दोनों की मंज़िल तय होती थी तो कभी-कभी दोनों किसी रचना को लेकर मिंटो ब्रिज के नीचे ही एकदूसरे से उलझ जाया करते थे.   

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मिंटो ब्रिज के साथ एक बड़ी दिक्क़त ये रही कि इसकी दोनों तरफ़ की टूट रही सीढ़ियों को रेलवे ने सही करवाने की कोशिश नहीं की. अब मिंटो ब्रिज रेलवे स्टेशन पर कुछ और लाइन बिछाई जा रही हैं, इसलिए उसका चौड़ीकरण हो रहा है. बहरहाल, मिंटो ब्रिज के हर साल डूबने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. इसका नतीजा ये हुआ है कि हाल ही में अंडरपास में जल भराव में फंसकर ‘छोटा हाथी’ ऑटो चलाने वाले एक ड्राइवर कुंदन की मौत हो गई. वे अपनी गाड़ी को पानी के बीच निकालने की कोशिश कर रहे थे.   

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