दुनियाभर के 200 से अधिक देशों में कोरोना वायरस का कहर जारी है. इस दौरान कई लोग मदद के लिए आगे भी आ रहे हैं. अपने देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए आयरलैंड के प्रधानमंत्री Leo Varadkar फिर से अपने डॉक्टरी पेशे में उतर आए हैं. पीएम होने के साथ-साथ वो कोरोना मरीज़ों का इलाज भी कर रहे हैं.
अब इसी तरह का फ़ैसला साल 2019 में ‘मिस इंग्लैंड’ रह चुकी भारतीय मूल की 24 वर्षीय भाषा मुखर्जी ने भी किया है. पेशे से डॉक्टर रह चुकी भाषा ने अपने ब्यूटी क्राउन को साइड में रख एक बार फिर डॉक्टर के रूप में कोरोना के ख़िलाफ़ काम करने का फ़ैसला किया है.
कोलकाता में जन्मी भाषा मुखर्जी पिछले साल मिस इंग्लैंड बनी थीं. 9 साल की उम्र में वो अपने परिवार के साथ इंग्लैंड चली गईं थी. भाषा मुखर्जी के पास दो मेडिकल डिग्रियां हैं. एक डिग्री मेडिकल साइंस में जबकि दूसरी मेडिसिन एंड सर्जरी में. भाषा का आईक्यू लेवल 146 है और 5 अलग-अलग भाषाओं पर उनकी अच्छी कमांड है.
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक़, मिस इंग्लैंड का ख़िताब जीतने से पहले भाषा मुखर्जी बोस्टन के एक अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के तौर पर काम किया करती थीं. लेकिन ब्रिटेन में कोरोना वायरस के बढ़ते ख़तरे को देखते हुए अपने मॉडलिंग करियर से ब्रेक लेकर भाषा एक बार फिर से डॉक्टर बन कर लोगों की सेवा कर रही हैं.
24 साल की भाषा मुखर्जी कई देशों में चैरिटी का काम भी करती हैं. मिस ब्रिटेन का ख़िताब जीतने के बाद से ही भाषा कई सारे चैरिटी से जुड़े कार्यों की एंबेस्डर के रूप में काम कर रही हैं. इस वजह से उन्हें दुनिया के कई देशों में घूमना पड़ता है.
भाषा मुखर्जी पिछले महीने ही भारत आई थीं. इस दौरान वो कई स्कूलों में गई थीं. जहां उन्होंने बच्चों को किताबें और पढ़ाई से संबंधित दूसरी चीज़ें डोनेट की थी. इसके अलावा वो तुर्की, अफ़्रीका और पाकिस्तान भी गई थीं.