Sammed Shikharji Controversy: क्या है सम्मेद शिखर विवाद, जैनियों के लिए क्यों इतना पवित्र है ये पर्वत?

Abhay Sinha

Sammed Shikharji Controversy: जैन समाज के लोग इस वक़्त देश भर में प्रदर्शन (Jains massive protest) कर रहे हैं. वजह बना है झारखंड के गिरिडीह स्थित जैन तीर्थस्थल ‘श्री सम्मेद शिखरजी’ को पर्यटन स्थल में बदलने का राज्य सरकार का फ़ैसला. जैन समाज इस फ़ैसले से नाराज़ है और वो सरकार से इसे बदलने की मांग कर रहा है.

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देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन

दिल्ली हो या मुंबई या फिर अहमदाबाद, हर जगह बड़ी तादाद में जैन समाज सड़कों पर निकल कर आंदोलन कर रहा है. मुंबई में काफ़ी लंबा मार्च निकाला गया. इस रैली में जैन धर्म के क़रीब 50 हज़ार लोग शामिल हुए.

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दिल्ली में भी उन्होंने राष्ट्रपति से मिलकर अपनी मांगें मनवाने की कोशिश की. विश्व जैन संगठन के बैनर तले हजारों लोगों ने रविवार को इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक कूच कर दिया. सभी राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति से मिलकर अपनी समस्या बताना चाहते थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें इंडिया गेट पर ही रोक लिया. 

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इसके अलावा अहमदाबाद की सड़कों पर जैन समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस 10 किलोमीटर तक के मार्च में करीब एक लाख लोग शामिल हुए. मध्य प्रदेश और राजस्थान में लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे हैं.

Sammed Shikharji Controversy: क्यों हो रहा विरोध?

झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ियों पर स्थित सम्मेद शिखरजी जैन समुदाय का सबसे बड़ा तीर्थ है. इसे जैन समाज का तीर्थराज कहा जाता है. इसके पीछे वजह है जैनियों की मान्यता. इसके मुताबिक, जैन समाज के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने यहां ही मोक्ष प्राप्त किया था. इसे पारसनाथ पर्वत भी कहा जाता है.

बता दें, जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से पहले तीर्थंकर ऋषभदेव, 12वें तीर्थंकर वासुपूज्य, 22वें तीर्थंकर नेमीनाथ और 24वें और अंतिम तीर्थंकर वर्धमान महावीर को छोड़कर बाकी के 20 तीर्थंकरों ने सम्मेद शिखर में मोक्ष प्राप्त किया था. इनमें जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने भी इसी तीर्थ में कठोर तप और ध्यान द्वारा मोक्ष प्राप्त किया था.

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अब हेमंत सोरेन सरकार ने पारसनाथ हिल्स में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस तीर्थ स्थल को पर्यटन क्षेत्र घोषित करने का फ़ैसला किया है. इस पर जैन समाज को एतराज़ है.

उनका कहना है कि अगर पारसनाथ हिल्स को पर्यटन क्षेत्र बनाया गया तो पर्यटकों के आने की वजह से यहां मांस, शराब का सेवन भी किया जाएगा. ये जैन समाज मंज़ूर नहीं कर सकता. अहिंसक जैन समाज के लिए अपने पवित्र तीर्थक्षेत्र में ऐसे कार्य असहनीय हैं. बता दें, सरकार की ओर से जारी की गई अधिसूचना में मछली और मुर्गी पालन के लिए भी अनुमति दी गई है. यही वजह है कि देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

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