चॉल में बीता जीवन, पिता थे सिक्योरिटी गार्ड, बेटे ने पलटी क़िस्मत, आज चलाते हैं करोड़ों की कंपनी

Vidushi

Success Story Of Sushil Singh : हमारे आसपास ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना कर अपनी कहानी ख़ुद लिखी है. इनके रास्ते में रुकावटें ख़ूब आईं, लेकिन ऐसा लगता है मानो इन्होंने अपनी क़िस्मत को अपनी मुट्ठी में हासिल करने की कसम खा रखी थी. इन लोगों ने अपने हौसलों को टूटने नहीं दिया. ऐसे ही एक व्यक्ति की इंस्पायरिंग कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं, जो उनकी कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और अपने सपनों को साकार करने की इच्‍छाशक्ति का सबूत है.

जिनकी कहानी हम आपको बताएंगे, उनका नाम सुशील सिंह (Sushil Singh) है. वो आज के समय में करोड़पति टेक्नोप्रेन्योर हैं और तीन सफ़ल कंपनियों के मालिक हैं. हालांकि, यहां तक पहुंचना उनके लिए बेहद कठिन था. आइए आज हम आपको उनकी सक्सेस स्टोरी बताते हैं, जो किसी प्रेरणा से कम नहीं है.

एक चॉल में बीता शुरुआती जीवन

सुशील सिंह एक ऐसे परिवार से आते हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमज़ोर थी. उनके पिता एक बैंक में सिक्योरिटी गार्ड थे. वहीं, मां एक होममेकर थीं. वो पहले अपने परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में रहा करते थे. लेकिन जब वहां कुछ ख़ास आय में वृद्धि नहीं हो पाई, तो उनका परिवार रोजगार की तलाश में मुंबई आ गया. वो शुरुआती दिनों में डोम्बिवली की बस्ती में एक चॉल में रहा करते थे.

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12वीं कक्षा में हुए फ़ेल

सुशील की पढ़ाई की बात करें, तो उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा भी कम आय वाले परिवारों के लिए खुले हिंदी-मीडियम स्कूल से पूरी की थी. उनका स्कूल कल्याण डोम्बिवली नगर निगम चलाता है. 10वीं कक्षा तक उन्होंने पढ़ाई में ख़ूब मन लगाया. लेकिन इसके बाद से उनका पढ़ाई से ध्यान भटक गया. नतीजा ये हुआ कि सुशील 12वीं कक्षा में फ़ेल हो गए. इसके बाद उन्होंने दोबारा प्रयास में जैसे-तैसे दूसरी साल अपनी 12वीं की परीक्षा पास की.

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सेकेंड ईयर में छोड़ा कॉलेज

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन के लिए एडमिशन लिया. इस दौरान उन्हें मज़ा तो आ रहा था, लेकिन उन्हें अपने प्रोफ़ेसर के पढ़ाने का तरीका समझ नहीं आता था. जब बिल्कुल बात नहीं बनी, तो उन्होंने 2003 में सेकेंड ईयर में कॉलेज छोड़ दिया. इसके बाद उन्होंने 2015 में पॉलिटेक्निक कोर्स पूरा किया. कोर्स पूरा करने के बाद वो कंपनी में एंट्री-लेवल टेलीकॉलर और सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में काम करने लगे. यहां उन्होंने 11,000 रुपए के मासिक वेतन से अपनी जॉब की शुरुआत की.

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शादी के बाद करियर में आया नया मोड़

इस दौरान उनकी 2013 में सरिता रावत सिंह से मुलाक़ात हुई. उस समय वो उसी कंपनी में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थीं. बाद में दोनों के बीच नज़दीकियां बढ़ीं और दोनों ने शादी कर ली. शादी के दो साल बाद दोनों ने एक US बेस्ड बिज़नेस के सपोर्ट से नोएडा में एक BPO में काम करना शुरू किया. यहां से SSR टेकविज़न की शुरुआत हुई. इस बिज़नेस के साथ तीन से चार महीने में काम करने के भीतर ही उन्हें नोएडा में एक को-वर्किंग स्पेस मिल गया.

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आज चलाते हैं करोड़ों की कंपनी

वो 2.5 साल तक इस कंपनी के साथ काम करते रहे. धीरे-धीरे उन्होंने अपनी कमाई से सेविंग्स की और इसी के बलबूते उन्होंने पूरे नोएडा भवन को खरीदने का फ़ैसला किया. उन्होंने इसके बाद अपना दूसरा बिज़नेस डीबाको शुरू किया. ये ग्लोबल B2C कपड़ों का ऑनलाइन स्टोर है. इसकी बागडोर सरिता के हाथों है. हाल ही में, उन्होंने अपना तीसरा बिज़नेस साइवा सिस्टम इंक लॉन्च किया है. ये एक मल्टीनेशनल कंपनी है, जिसकी शुरुआत सुशील ने साल 2019 में की थी. ये कंपनियों को उनकी ज़रूरत के अनुसार शीर्ष कैंडिडेट खोजने में मदद करती है.

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