संकेत सरगर: कभी पापा के साथ चलाते थे पान-चाय की दुकान, आज भारत को दिलाया CWG 2022 में पहला मेडल

J P Gupta

Commonwealth Games 2022: इंग्लैंड के बर्मिंघम में खेले जा रहे 22वें कॉमनवेल्थ गेम्स के दूसरे दिन भारत का खाता सिल्वर मेडल से खुला. देश के लिए पहला मेडल वेटलिफ़्टर संकेत महादेव सरगर (Sanket Mahadev Sargar) ने मेन्स वेटलिफ़्टिंग के 55 KG इवेंट में जीता. संकेत स्नैच राउंड में 113 KG और क्लीन एंड जर्क राउंड में 135 KG वज़न उठाकर मेडल पक्का किया. उन्होंने टोटल 248 KG वेट उठाया. 

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गोल्ड मेडल मलेशिया के मोहम्मद अनीक बिन कसदन (Mohammad Aniq Bin Kasdan) ने अपने अंतिम प्रयास में कुल 249 वज़न उठाकर जीता. संकेत महादेव सरगर भारत के स्टार वेटलिफ़्टर हैं. उन्होंने इससे पहले कई बार भारत का नाम रौशन किया है. चलिए आपको इस स्टार वेटलिफ़्टर से जुड़ी सारी डिटेल्स बता देते हैं… 

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13 साल की उम्र में शुरू की वेटलिफ़्टिंग 

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संकेत महादेव सरगर महाराष्ट्र के सांगली के रहने वाले हैं. इन्होंने 13 साल की उम्र में ही अपनी बहन के साथ वेटलिफ़्टिंग करना शुरू कर दिया था. संकेत 3 बार के राष्ट्रीय चैंपियन हैं. वो कोल्हापुर के शिवाजी विश्वविद्यालय में इतिहास के छात्र हैं. इन्हें पिछले साल अक्टूबर में एनआईएस पटियाला में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया था. 

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पिछले साल जीता था गोल्ड 

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संकेत ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2020 और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2020 में स्वर्ण पदक जीता था. वो शर्मीले स्वभाव के हैं और अपने स्पोर्टिंग स्टाफ़ के अलावा किसी से जल्दी बात नहीं करते. पिछले साल ताशकंद Commonwealth Weightlifting Championships में इन्होंने गोल्ड मेडल जीता था. यहां इन्होंने स्नैच राउंड में 113 KG वज़न उठाया था. ये पदक भी इन्होंने 55 KG कैटेगरी में जीता था. 

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पिता चलाते हैं पान की दुकान 

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इनके पिता महादेव सरगर की सांगली में एक पान की दुकान. साथ में वो एक छोटा सा टी-स्टॉल भी चलाते हैं. संकेत जब घर पर जाते थे तो वो भी इस काम में उनका हाथ बटाते थे. जो लोग जानते हैं कि वो वेटलिफ़्टर हैं तो वो अकसर उनसे कहते थे कि वो पान की टपरी (दुकान) पर क्यों बैठते हैं. तब वो कहते कि यही उनकी रोज़ी-रोटी है, इसी से उन्होंने ट्रेनिंग की फ़ीस भरी है. 

पिता को देना चाहते हैं ख़ुशियां 

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संकेत महादेव सरगर (Sanket Mahadev Sargar) का कहना है कि उनके पिता ने उनको ट्रेनिंग दिलवाने के लिए बहुत कष्ट उठाए हैं. उनके पिता गांव से सांगली रोज़ी-रोटी की तलाश में आए थे. संकेत पेरिस ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत उन्हें आराम देना चाहते हैं. उनका सपना है कि वो अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहारा देकर अपने पिता का दामन ख़ुशियों से भर दें. 

संकेत सरगर के जज़्बे को हमारा सलाम. 

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