एक्टर वो है, जो गिरगिट की तरह रंग बदल लेता है. जैसा देस (रोल) हो, वैसा भेस बना लेता है. ख़ुद को उस रोल में सोख लेता है. ऐसा एक्टर हर दिन पैदा नहीं होता, ऐसा कलाकार सदियों में आता है. वो कलाकार थे अमरीश पुरी. वर्ना पल में नफ़रत भर देने वाला विलेन बन जाना और उसी पल एक बाप का रोल करना, हर एक्टर के बस की बात नहीं.

अगर दुनिया अमरीश पुरी को Mr. India के ज़ालिम मोगैम्बो के रूप में याद करती है और DDLJ में सिमरन के परम्परावादी पिता के रूप में भी नहीं भूलती, तो ये एक एक्टर की जीत है. उसकी कलाकारी की भी कि वो इन दोनों विपरीत किरदारों को जी पाया.

हम भारतीयों के लिए अगर वो Mogambo थे, तो वेस्ट के लिए स्टीवन स्पीलबर्ग की फ़िल्म Indiana Jones and Temple of Doom के मोला राम. एक दफ़ा स्पीलबर्ग ने उनके बारे में कहा था कि वो दुनिया के बेस्ट विलेन हैं और उनके जैसा दुनिया में कोई नहीं हो सकता.

चलिए नज़र डालते हैं उनके कुछ बेहतरीन किरदारों की तरफ़:

1. गर्दिश

1993 की इस फ़िल्म में अमरीश पुरी ने एक ईमानदार पुलिस हवलदार का किरदार निभाया था. ये हवलदार अपने बेटे को पुलिस इंस्पेक्टर बनते हुए देखना चाहता है, लेकिन क़िस्मत ने उसके लिए कुछ और ही लिखा हुआ था.

2. विरासत

ये फ़िल्म 1997 में आई थी और इसके लिए अनिल कपूर-तबु को भी बखूबी याद किया जाता है. अमरीश पुरी इस फ़िल्म में एक ऐसे पिता के रोल में थे, जो अपने बेटे के विदेश सेटेल होने के फ़ैसले के खिलाफ़ था, वो चाहता था कि उसका बेटा गांव में रह कर गांव के लिए काम करे. इस फ़िल्म के लिए अमरीश पुरी को नेशनल अवॉर्ड भी मिला था.

3. घातक

इस फ़िल्म को कौन भूल सकता है? फ़िल्म में फ़्रीडम फ़ाइटर शम्भुनाथ अपने बेटे सनी देओल के साथ दुश्मनों की ऐसी-तैसी कर देता है.

4. DDLJ

'जा सिमरन, जी ले अपनी ज़िन्दगी' का डायलॉग यूं ही नहीं हिट हुआ, इसे बोलने वाला एक्टर था अमरीश पुरी. इस फ़िल्म में सिमरन का पिता वो इंसान है, जो लंदन में रहते हुए भी अपनी जड़ें नहीं भूला है. वो अपनी बेटियों से भी उसी सोच को अपनाने की आशा रखता है. लेकिन परदेस में उसे अपने देश की महक खलती है, इसलिए वो अपनी बेटी की शादी भी जबरन अपने पिंड में करवाना चाहता है. 1995 में आई इस फ़िल्म ने बॉलीवुड में फ़िल्मों की दिशा बदल दी थी और बाप का रोल भी.

5. फूल और कांटे

गुंडई के राजा बने अमरीश अपने बेटे को अपनी ही राह में चलने देना चाहता है लेकिन उसके कुछ दोस्त उससे दुश्मनी निकालने के चक्कर में उसके पोते को किडनैप कर लेते हैं.

6. Mr. India

किस को याद नहीं है Mogambo? उसका एक ही मकसद है, भारत पर अपना कब्ज़ा करना और उसके इस मिशन को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं उसके गुंडे. लेकिन उन्हें रोकने वाला एक ही आदमी है Mr. India.

7. घायल

घायल का बलवंत राय, जो शहर का नामी-गिरामी वकील होने के बाद भी अपने गोरखधंधे बंद नहीं करता. उसके इस कपट का शिकार बनती है सनी देओल की फ़ैमिली, फिर वो बलवंत राय के साथ वो करता है, जो उसने उसके कुत्तों के साथ किया था. इस फ़िल्म का बलवंत राय आज भी सभी को याद है.

8. मेरी जंग

इस फ़िल्म में भी पुरी साहब ने एक ऐसे वकील का किरदार निभाया था, जो एक बेगुनाह को सूली पर चढ़ा देता है. सालों बाद उसी आदमी का बेटा, अनिल कपूर उस वकील से बदल लेता है और उसे भी सूली पर चढ़ा दिया जाता है.

9. दामिनी

इस फ़िल्म को जितना मीनाक्षी शेषाद्री के रोल के लिए याद किया जाता है, उतना ही लॉयर बने अमरीश पुरी के रोल को भी. बॉलीवुड की कुछ-एक बेहतरीन महिला प्रधान फ़िल्मों में से एक थी दामिनी.

10. नगीना

इस फ़िल्म में सपेरा भैंरो सिंह नागों को प्यारी, उनकी मणि पर कब्ज़ा करने के लिए षड्यंत्र रचता है. अमरीश पुरी के साधु की एक्टिंग इतनी ज़बरदस्त थी कि इसकी छवि पर्दे पर बाबा बने सभी कलाकारों में देखने को मिलती है.

11. करन-अर्जुन

करन-अर्जुन का दुर्जन सिंह प्रॉपर्टी के लिए राखी के दोनों लड़कों को मार देता है. बाद में वो ही लड़के दूसरे जनम में उससे बदला लेने आते हैं.

12. दिलजले

ये फ़िल्म तब आई थी, जब भारत में आतंकी गतिविधियां अपने चरम पर थीं. दारा एक ऐसी आतंकवादी संगठन का सरगना था, जिसका मकसद सिर्फ़ आतंक फ़ैलाना था. लेकिन उसके Right हैंड, अजय देवगन के अच्छाई के रास्ते पर चलने का फ़ैसला उसे पसंद नहीं आता. वो डायलॉग तो याद ही होगा, 'दिल जले, दिल जले'.

13. राम-लखन

राम और लखन का वो चाचा, बिशम्बर, जो पहले उनके बाप-दादा की हत्या करवाता है, फिर उनकी प्रॉपर्टी हड़प लेता है. ये फ़िल्म अमरीश पुरी की एक्टिंग के बिना कभी हिट नहीं होती.

14. ग़दर का अशरफ़ अली

सकीना का पिता बना अशरफ़ अली, जिसने सनी देओल को हैंडपंप उखाड़ने पर मजबूर कर दिया था. 2001 की इस हिट फ़िल्म में अमरीश पुरी ने एक पाकिस्तानी नेता की भूमिका बहुत अच्छे से निभायी थी.

2005 में भारतीय सिनेमा से उसका सबसे अच्छा विलेन छिन गया लेकिन उसकी अदायगी को हम कभी नहीं भूल पाएंगे.

Source: Hindustan Times

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