भारतीय सिनेमा की सबसे सफ़ल फ़िल्मों में से एक है शोले. 1975 में आयी ये फ़िल्म 90 के बाद की जेनेरेशन के लिए किसी करिश्मे से कम नहीं है. इस फ़िल्म का एक-एक कैरेक्टर, एक-एक सीन, एक-एक डायलॉग लोगों को याद है. इसमें कोई शक नहीं कि ये फ़िल्म हर भारतीय की सबसे ख़ास फ़िल्मों में से एक है. कई बार ये कहा जा चुका है कि अगर ये फ़िल्म आज रिलीज़ होती, तो शायद और भी बड़ी हिट होती लेकिन सालों पहले किसी ने इस फ़िल्म का ऐसा रिव्यु लिखा था, जिसे पढ़ने के बाद हर शोले Fan का मूड ख़राब हो जाए.

ट्विटर पर अनुपम खेर ने किसी पुरानी मैगज़ीन का सालों पुराना रिव्यु शेयर किया है. मैगज़ीन का नाम कहीं नहीं है और न ही इसे लिखने वाले का. रिव्यु लिखते हुए जनाब ने शोले को एक 'एवरेज' फ़िल्म कहा है.

ये लिखते हैं, 'लगभग 3 करोड़ में बनने वाली ये फ़िल्म किसी आम बॉलीवुड फ़िल्म की तरह है, जिसमें मार-धाड़ और बदला ही है.

जिन्हें आज हम सदी के महानायक कह कर बुलाते हैं, उन्हें इस फ़िल्म क्रिटिक ने 'Dharam and his co-killer' कह कर सम्बोधित किया है. इस पूरे रिव्यु में कहीं भी अमिताभ बच्चन का नाम ही नहीं लिया गया है. और उतना ही दुःख अमजद खान के रोले के लिए लिखा उनका रिव्यु पढ़ कर हुआ. इन जनाब के हिसाब से अमजद खान उस रोल के लिए फ़िट नहीं थे. 'जितना डरावना एक डाकू होना चाहिए थे, वो उसके उलट मोटे, छोटे हैं.'

इन्होंने संजीव कुमार को भी नहीं बख़्शा और लिख दिया कि उनकी जगह कोई और ये रोल बेहतर कर सकता था लेकिन उन्हें इसलिए लिया गया ताकि उनके सेलेब स्टेटस को भुना सकें.

इस पूरे रिव्यु में जिन दो लोगों की तारीफ़ हुई है, वो हैं जया भादुड़ी और हेमा मालिनी. जया के लिए दिल खोल कर तारीफ़ करते हुए लिखा गया है, कि बिना बोले कोई एक्ट्रेस इतने अच्छे एक्सप्रेशंस कैसे दे सकती है? ऐसा भारत में सिर्फ़ जया भादुड़ी ही कर सकती हैं. हेमा मालिनी के लिए लिखा है कि उन्होंने एक गांव की लड़की के रोल को अच्छे से निभाया है.

आज के दर्शक के तौर पर मैं हमेशा ये सोचती थी कि जब शोले रिलीज़ हुई होगी, तो इसका स्टेटस क्या रहा होगा. इसका रिव्यु किस तरह से किया गया होगा लेकिन ये रिव्यु तो कुछ ही निकला. मेरे लिए शोले अब भी एक ब्लॉकबस्टर हिट है.