रविवार की सुबह Rampally झील के किनारे बसे लोगों ने जब झील की ओर रुख किया तो उनकी नज़रें झील के किनारे मरी हुई 30,000 मछलियों पर ठहर गईं. ये झील हैदराबाद शहर से लगभग तीस किलोमीटर दूर है.

इस घटना से कुछ ही दिन पहले Shamirpet झील में लगभग 40,000 मरी मछलियां तैर रहीं थीं और वहीं Medchal झील में भी 20,000 मछलियां मृत पाई गई थीं.

Source: TOI

अधिकारियों ने मछुआरों को मरी मछलियां झील से हटाने और 1 लाख ज़िन्दा मछलियों को झील में डालने की सलाह दी है.

Medak के District Fisheries Officer, E Balaiah नें टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बताया कि अधिकारियों का कहना है मछलियां वातावरण के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं. बढ़ते तापमान की वजह से उनका ज़िन्दा रहना बहुत मुश्किल है, इसके अलावा पानी में ऑक्सीज़न का स्तर बहुत कम हो गया है. इस वजह से मछलियां मर रही हैं.

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इस बारे में विशेषज्ञों का मानना है, तापमान को नियंत्रित रखने के लिए जितने पेड़ लगाने जाने चाहिए थे उतने नहीं लगाये गए. पेड़ ही तापमान का नियंत्रण कर सकते हैं. हैदराबाद के आस-पास के इलाक़ों में प्रदूषण का बढ़ता स्तर भी बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की वजह हो सकती है.

Environmental Expert, Professor K Purushotham Reddy का मानना है कि, उद्योगों और घरों से निकलने वाले ख़तरनाक केमिकल्स को बिना फ़िल्टर किये नालियों के रास्ते सीधे झीलों और तालाबों में गिरा दिए जाते हैं. इनमें मौज़ूद ख़तरनाक तत्व मछलियों और अन्य जलीय जंतुओं के लिए ज़हर का काम करते हैं, जिसकी वजह से इनकी मौत हो जाती है.

मछुआरों का कहना है झील में प्रदूषण का स्तर अब बहुत बढ़ गया है. प्रदूषण के लिए सिर्फ़ उद्योगों से निकलने वाली गंदगी ही नहीं ज़िम्मेदार है, बल्कि तेज़ी से बढ़ती कॉलोनियां भी ज़िम्मेदार हैं. जहां की नालियों से निकलने वाले कचरे पानी में सीधे गिराए जाते हैं. झील का पानी साफ़ रहे भी तो कैसे?

प्रदूषण का बढ़ता स्तर इंसान और जलीय जंतुओं दोनों के लिए हानिकारक है, अगर समय से पर्यावरण प्रदूषण की रोक-थाम के उपाय नहीं किये गए तो, सभी जीवों के लिए कभी न थमने वाला संकट पैदा हो जायेगा.

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