कुछ समय पहले पास हुए कृषि क़ानूनों के विरोध में पिछले दो महीनों से किसान दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर्स पर धरना-प्रदर्शन कर रहें हैं. सरकार से कई दौरों की बातचीत बेनतीज़ा रही है. अलग-अलग राज्यों से आये लाखों किसान सरकार से क़ानून रद्द करने की मांग कर रहें हैं. सड़क पर कड़ी ठंड और बारिश का सामना करते हुए अब तक 100 से ज़्यादा किसानों की मौत हो चुकी है. कई किसानों को पुलिस ने गिरफ़्तार किया है तो कुछ घायल हैं. इस आंदोलन में रिपोर्टिंग कर रहे कई पत्रकारों को भी गिरफ़्तार किया गया है. पुलिस के साथ हुई झपड़ों में में क़रीब 100 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं. 

इस सब के बावज़ूद किसान डटे हुए हैं और कथित तौर पर कॉर्पोरेट को फ़ायदा पहुंचाने वाले क़ानून को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं. ऐसे में हमने टिकरी और गाज़ीपुर बॉर्डर का दौरा किया और वहां से लाए हैं वो तस्वीरें जो आंदोलन का हर चेहरा आपके सामने रखती है: 

1. गाज़ीपुर बॉर्डर पर लगे Barricades, ट्रैक्टर ट्रोली में बैठा एक मायूस किसान और ट्रैक्टर पर लहराता तिरंगा.  

2. सड़क पर अब बसेरा है, ठंड - बारिश से भी मुक़ाबला है.   

3. एक ट्रॉली में सोते हैं 6 से ज़्यादा किसान, इनके 'आराम' का अंदाज़ा आप लगा ही सकते हैं!   

4. गांव से फल आए हैं. 

5. टिकरी बॉर्डर पर नहाता हुआ एक किसान.

6. टिकरी बॉर्डर के फ़ुटपाथ पर तिरंगा और 'I Love Kisan' के बैज से सजी एक दुकान. 

7. Trolly Times की एक प्रति. 

8. प्रदर्शन के भीतर किसानों के पढ़ने-लिखने के लिए स्थापित की गयी है भगत सिंह लाइब्रेरी. 

9. टिकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन स्थल इतनी दूर तक फैला हुआ है कि उसके एक छोर से दूसरे छोड़ तक जाने के लिए आपको ऑटो लेना पड़ सकता है. 

10. लंगर के लिए खाना तैयार करते किसान.

11. किसान आंदोलन में चाय पर चर्चा.  

12. Tear Gas Shell से घायल एक प्रदर्शनकारी.

13. किसानों के प्रेरणा स्रोत - लाल बहादुर शास्त्री जी की तस्वीर के साथ धरने पर बैठा एक किसान (गाज़ीपुर बॉर्डर). 

14. खाने-पीने का सामान. 

15. मंच से बोलते किसान नेता. 

16. विचार विमर्श में तल्लीन किसान नेता. 

17. मोर्चा निकालते किसान. 

18. जहां जाएंगे मिट्टी की ख़ुशबू लेते जाएंगे. 

19. प्रदर्शन स्थल पर लगा ये बैनर बहुत कुछ कहता है.  

20. ख़ालसा ऐड की तरफ़ से किसानों के सोने के लिए बनाया गया गया टेंट. 

अगर आप प्रदर्शन कर रहे किसानों को देश का दुश्मन मानते हैं, तो इन प्रदर्शन स्थलों का दौरा करें और उनसे बात करें, क्योंकि सबकुछ सोशल मीडिया पर नहीं है.