भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (A. P. J. Abdul Kalam) करोड़ों भारतीयों के प्रेरणादायक थे. डॉ. कलाम ही वो शख़्स थे जिन्होंने भारत (India) को साइंस एंड टेक्नोलॉजी (Science And Technology) के क्षेत्र में एक नई पहचान दी थी. राष्ट्रपति बनने से पहले वो इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) और डिफ़ेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) में एयरोस्पेस साइंटिस्ट थे. अपने आविष्कारों से देश को सुपर पावर बनाने की वजह से ही उन्हें मिसाइल मैन (Missile-Man) के नाम से जाना जाता था.

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इसरो और डीआरडीओ में कार्यरत के दौरान डॉ. कलाम, भारत के सिविल स्पेस प्रोग्राम और मिलिट्री मिसाइल डेवलपमेंट प्रयासों में मुख्य रूप से शामिल रहे थे. डॉ. कलाम के नेतृत्व में बनने वाले प्रमुख हथियारों में 'ब्रह्मोस', 'पृथ्वी', 'अग्नि', 'त्रिशूल', 'आकाश', 'नाग' समेत कई अन्य मिसाइल व 'इसरो लॉन्चिंग व्हीकल प्रोग्राम' भी शामिल है. उन्होंने भारत को 6 ऐसी अनमोल चीजे़ं दीं, जिन्होंने देश की छवि ही बदलकर रख दिया है. आज डॉ. कलाम के प्रयासों से ही भारत दुनिया का सुपर पावर बनने की ओर अग्रसर है.

ये हैं वो 6 मिसाइलें जिन्हें डॉ.कलाम ने बनाया था-

1- पृथ्वी-1 मिसाइल 

पृथ्वी-1 मिसाइल का पहला प्रक्षेपण 25 फ़रवरी 1988 में किया गया था. इस मिसाइल का परीक्षण अब्दुुल कलाम की देखरेख में ओडिशा के धामरा तट के द्वीप पर किया गया था. ये मिसाइल 500 से 1000 किलोग्राम वजन तक के अस्त्र ले जाने में सक्षम है. इसकी रेंज 200-250 किलोमीटर है. पृथ्वी (I) के बाद 27 जनवरी, 1996 को पृथ्वी (II) और 23 जनवरी, 2004 को पृथ्वी (III) मिसाइल का भी सफ़ल प्रक्षेपण किया गया था.  

Prithvi -1 Missile
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2- बह्मोस मिसाइल

ब्रह्मोस एक सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है. इसे पनडुब्बी से ही नहीं, बल्कि पानी के जहाज़, विमान या ज़मीन से भी छोड़ा जा सकता है. बह्मोस की की रफ़्तार 2.8 मैक है जो ध्वनि की रफ़्तार के बराबर मानी जाती है. इसकी रेंज 290 किलोमीटर है. ये 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री ले जाने में सक्षम है. ब्रह्मोस की सबसे ख़ास बात ये है कि ये हवा में ही मार्ग बदल सकती है. ये किसी भी चलते-फिरते लक्ष्य को भेद सकती है. बह्मोस का पहला परीक्षण 12 जून 2001 को हुआ था. इसे ख़ास तौर पर इंडियन आर्मी और नेवी के लिए बनाया गया है. 

Brahmose  Missile
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3- अग्नि-1 मिसाइल 

अग्नि-1 मिसाइल का परीक्षण 25 जनवरी 2002 को किया गया था. स्वदेशी तकनीक से विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली इस परमाणु सक्षम मिसाइल की मारक क्षमता 700 से 900 किलोमीटर है. ये मध्यम रेंज की बालिस्टिक मिसाइल है. ये 1000 किलो तक के परमाणु हथियार ढोने की सक्षमता रखती है. अग्नि-1 में विशेष नौवहन प्रणाली लगी है, जो ये तय करती है कि मिसाइल सटीक निशाने के साथ अपने लक्ष्य पर पहुंचे. अग्नि-1 के बाद अग्नि-2,अग्नि-3,अग्नि-4 मिसाइल का सफ़ल प्रक्षेपण भी किया जा चुका है.  

Agni-1 Ballistic Missile
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4- त्रिशूल मिसाइल 

त्रिशूल सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल मानी जाती है. ये कम दूरी से भी ज़मीन से हवा में मार करने में सक्षम है. इसकी मारक क्षमता 9 किमी है. इस मिसाइल का परीक्षण भारत के पूर्वी तट पर भुवनेश्वर से 180 किलोमीटर दूर स्थित चांदीपुर की रेंज में किया गया था. परीक्षण के दौरान इस मिसाइल को एक मोबाइल लॉन्चर के ज़रिए छोड़ा गया. इस मिसाइल की ख़ास बात ये है कि ये जल, थल और वायु तीनों में काम करती है. 

Trishul Missile
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5- आकाश मिसाइल 

स्वदेशी तकनीक से निर्मित 'अकाश मिसाइल' को डीआरडीओ ने विकसित किया था. ये मिसाइल हवा में दुश्मन के विमान को 40 किमी दूर व 18 हज़ार मीटर ऊंचाई तक टारगेट बना सकती है. इसमें लड़ाकू जेट विमानों, क्रूज मिसाइलों और हवा से सतह वाली मिसाइलों के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइलों को बेअसर करने की क्षमता भी है. 2 करोड़ रुपये की की लागत से बनी आकाश मिसाइल पूरी तरह से गतिशील है और ये काफ़िले में भी रक्षा करने में सक्षम है. 

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6- नाग मिसाइल 

नाग थर्ड जेनेरेशन की मिसाइल है. इस स्वदेशी मिसाइल को Prospina के नाम से भी जाना जाता है. टैंक भेदी मिसाइल है. इसकी मारक क्षमता 500 मीटर से 4 किमी तक है. ये देश की उन 5 मिसाइल प्रणालियों में से एक है, जिसे DRDO ने विकसित की है. क़रीब 3.2 करोड़ रुपये की लागत से बनी 'नाग' को 'दागो और भूल जाओ' टैंक रोधी मिसाइल भी कहा जाता है, क्योंकि एक बार इसे दागे जाने के बाद दोबारा निर्देशित करने की आवश्यकता नहीं पड़ती.  

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अब्दुल कलाम के निर्देशन में बनी ये 6 बहुमुखी मिसाइलें भारत को दुनिया के अन्य संपन्न देशों के सामने मजबूती से खड़ा करती हैं.