कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक चलने वाले इस छठ पर्व को हिंदू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम धर्म के लोग भी मनाते हैं. इस त्यौहार को बिहार और उत्तर प्रदेश में ख़ास तौर से मनाया जाता है. इसे सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस पर्व के पहले दिन की शुरुआत छठ पूजा और नहाय खाय के साथ होती है. इसके बाद दूसरे दिन खरना और सूरज को अर्घ्य दिया जाता है. फिर आख़िरी दिन सूर्य को सुबह अर्ध्य देने के साथ ये त्यौहार संपन्न होता है.

chhath pooja
Source: wikimedia

ये भी पढ़ें: Chhath Pooja 2021: अपने दोस्तों और फ़ैमिली को ये 35+ Chhath Quotes और Wishes भेजकर विश करें

इन सब बातों के परे हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई धार्मिक मान्याता या कहानियां ज़रूर होती हैं, ऐसी ही 4 कहानियां छठ पर्व से भी जुड़ी हैं, जो आप लोगों को जाननी चाहिए:

महाभारत काल से जुड़ी हैं दो कहानियां

Mahabharat yug
Source: assettype

महाभारत काल के अनुसार, जब पांडव अपना सारा राज पाठ जुएं में हार गए थे तब द्रौपदी ने अपना सब वापस लेने के लिए छठ का व्रत किया था, जिससे उन्हें सब कुछ वापस मिल गया था. वहीं, दूसरी कहानी सूर्य पुत्र कर्ण से जुड़ी है, कहते हैं, सूर्य पुत्र कर्ण ने ही छठ पूजा की शुरुआत की थी. वो भगवान सूर्य के इतने बड़े भक्त थे कि रोज़ घंटों कमर तक पानी में खड़े रहकर सूर्य को अर्घ्‍य देते थे. इसी भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य भगवान ने कर्ण को महान योद्धा बनने का वरदान दिया.

ये भी पढ़ें: आपने अपने शहर में छठ देखा होगा, लेकिन कभी छठ में बिहार जाइए, लगावेलु लिपस्टिक भूल जाएंगे, छठ नहीं

भगवान राम ने अयोध्या लौटने पर राजसूर्य यज्ञ किया था

Chhath is a Vedic ritual dedicated to Hindu solar deity Surya
Source: bhaskarassets

तीसरी कहानी भगवान राम की अयोध्या वापसी से जुड़ी है, जब वो विजयादशमी के दिन लंकापति रावण का वध करने के बाद अयोध्या पहुंचे तो उन्होंने ऋषि-मुनियों से सलाह ली. इसके बाद रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए राजसूर्य यज्ञ किया. इस यज्ञ को करने के लिए मुग्दल ऋषि को अयोध्या बुलाया गया, जिन्होंने माता सीता को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने को कहा. मुग्दल ऋषि के आदेश का पालन करते हुए सीता जी ने उनके आश्रम में 6 दिन कर कर सूर्यदेव भगवान की पूजा की.

चौथी कहानी राजा प्रियंवद से जुड़ी है

This festival is unique to the states of Bihar, Jharkhand, eastern Uttar Pradesh
Source: amarujala

राजा प्रियंवद और रानी मालिनी की कोई संतान नहीं थी. इसलिए इस दंपति ने महर्षि कश्यप के कहने पर यज्ञ किया जिसके चलते उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई, लेकिन दुर्भाग्य वश उनका ये पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ, जिससे विचलित हो राजा-रानी ने ख़ुद के प्राण त्यागने की सोची. तभी ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना वहां प्रकट हुईं और उन्होंने राजा से कहा कि वो सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं इसी कारण वो षष्ठी कहलातीं हैं. इसलिए उनकी पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होगी. राजा प्रियंवद और रानी मालिनी ने देवी षष्ठी का व्रत और पूजा पूरे विधि विधान से की जिससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई. कहते हैं ये पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी, इसीलिए तभी से छठ पूजा की जाने लगी.

कौन हैं छठ मइया?

 Know the history and importance of Chhath festival
Source: indiapublickhabar

ब्रह्मा की मानसपुत्री देवसेना ही षष्‍ठी देवी हैं, जिन्हें स्‍थानीय बोली में छठ मइया कहा जाता है. इनकी पूजा-अर्चना करने से नि:संतानों को संतान की प्राप्ति होती है. इसीलिए नवजात शिशु के जन्म के 6 दिन बाद छठी की जाती है. पुराणों में इन देवी को कात्‍यायनी भी कहते हैं, जिनके पूजा नवरात्र में षष्‍ठी तिथि‍ पर होती है.

सूर्य का षष्‍ठी के दिन पूजन का महत्‍व

The festival is dedicated to worshiping Lord Surya
Source: financialexpress

हमारे पुराणों में हर देवी-देवता की पूजा का कोई विशेष दिन और तिथि है. जैसे, गणेश की पूजा चतुर्थी को, विष्‍णु जी की पूजा एकादशी और सूर्य की पूजा सप्‍तमी तिथि‍ को की जाती है, जिसे सूर्य सप्‍तमी, रथ सप्‍तमी भी कहा जाता है, लेकिन छठ में षष्ठी के दिन सूर्य की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है.