मुंबई (Mumbai) के सबसे मशहूर जगहों में से एक है, द गेटवे ऑफ़ इंडिया (The Gateway of India). मुंबई घूमने आने वाला हर शख़्स यहां आकर तस्वीरें ज़रूर खिंचवाता है. अरब सागर के पास, छत्रपति शिवाजी मार्ग पर स्तिथ ये इमारत न सिर्फ़ ये मुंबई की शान का हिस्सा है बल्कि ये इमारत ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है.  

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बहुत कम लोगों को पता होगा कि द गेटवे ऑफ़ इंडिया की नक़ल का एक रेप्लिका(Replica) भी है. मुंबई के Gamdevi एरिया स्थित Bhendi Galli में यशवंत सिद्धी कोपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (Yashwant Siddhi Cooperative Housing Society) में एक छोटा सा 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' का Replica है. आने-जाने वालों की नज़रें तो पड़ी ही होंगी इस पर सवाल भी आया होगा कि आख़िर ये छोटा सा ढांचा वहां क्यों है. Live History India के लेख के मुताबिक़, कभी इस स्थान पर गेटवे ऑफ़ इंडिया समेत मुंबई की कई इमारतों का निर्माण करने वाले, राव बहादुर यशवंतराव हरिशचंद्र देसाई का घर था.  

The gateway of India Replica
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Deccan Herald के एक लेख के अनुसार, ये 6 फ़ीट का Replica एक पार्किंग लॉट (Parking Lot) और कोर्टयार्ड (Courtyard) में है और इसकी अच्छे से देख-रेख की जाती है. Live History India के लेख की मानें तो इस Replica का इस्तेमाल एक रेफ़रेंस मॉडल (Reference Model) की तरह किया गया था.  

Miniature gateway of India
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मुंबई के बेहद सुंदर इमारतें, जैसे सीएसटी रेलवे स्टेशन (CST Railway Station), जनरल पोस्ट ऑफ़िस (General Post Office) कावसजी जहांगीर हॉल (Cowasjee Jehangir Hall) आदि बनाने का श्रेय अंग्रेज़ों का जाता है. हक़ीक़त ये है कि इन सब इमारतों के निर्माण में हज़ारों हिन्दुस्तानियों का श्रम लगा था. मुंबई का इतिहास पलटें तो अंग्रेज़ी आर्किटेक्ट्स की तारीफ़ों के कई पन्ने मिलेंगे लेकिन यशवंतराव देसाई के बारे में ही कम ही बातें मिलेंगी. यशवंतराव प्रिंस वेल्स म्युज़ियम (Prince Wales Museum), रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस (Royal Institue od Science) के भी सुपरवाइज़र थे. 

Heirloom The Gateway of India
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द गेटवे ऑफ़ इंडिया को किंग जॉर्ज V और क्वीन मैरी के भारत आने की ख़ुशी में बनवाया गया था. दिसंबर 1911 में इन दोनों को दिल्ली दरबार में भारत का महाराजा और महारानी घोषित किया गया था. 31 मार्च 1911 को मुंबई के गवर्न Sir George Sydenham Clarke ने इसकी आधारशिला रखी थी. 4 दिसंबर, 1924 को इसका उद्घाटन, भारत के तत्कालीन वायसरॉय, Rufus Isaacs ने किया.