भारत (India) में पिछले कई दशकों से हम नोट और सिक्कों की मदद से ही लेनदेन करते आ रहे हैं. हालांकि, पिछले कुछ सालों से लेनदेन ‘डिजिटल पेमेंट्स’ के ज़रिए भी होने लगी है, लेकिन आज भी एक तबका ऐसा है जो कैश में ही लेनदेन करना पसंद करता है.

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हमारे देश में मौजूदा समय में 2000, 500, 200, 100, 50, 20, 10, 5, 2 और 1 रुपये के नोट प्रचलन में हैं. इसके अलावा भारत में 1, 2, 5, 10, 20 रुपये के सिक्के भी प्रचलन में हैं. हम दिन भर में कई बार सिक्कों में लेनदेन करते रहते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सिक्कों पर अंकित ख़ास चिह्नों पर गौर किया है?  

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अगर आपके पास अभी कोई सिक्का है तो उसे गौर से देखें. हर सिक्के पर उसका प्रोडक्शन ईयर लिखा होता है. इसके ठीक नीचे ‘डॉट’, ‘स्टार’ या फिर ‘डायमंड’ जैसे निशान दिखाई दे रहे होंगे. क्या आप जानते हैं इनका क्या मतलब होता है?

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चलिए आज हम आपको इसके पीछे की ख़ास वजह भी बता देते हैं-

दरअसल, किसी भी सिक्के पर ‘ईयर ऑफ़ प्रॉडक्शन‘ के ठीक नीचे दिखाई देने वाले ये अलग-अलग चिह्न इस बात की ओर इशारा करते हैं कि ये देश के किस शहर में बने हैं. जी हां, इन चिह्नों की पहचान मिंट (Mint) से होती है. मिंट का मतलब होता है जहां सिक्के बनाये जाते हैं.

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भारत के इन 4 शहरों में हैं ‘मिंट’  

भारत के केवल 4 शहरों में ही सिक्के बनाए जाते हैं. इन शहरों में कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई और नोएडा शामिल हैं. ‘कोलकाता मिंट’ देश का सबसे पुराना मिंट है. इसकी स्थापना 1757 में हुई थी. ‘मुंबई मिंट’ की स्थापना साल 1829 में हुई थी. ‘हैदराबाद मिंट’ की स्थापना साल 1903 में हुई थी. जबकि ‘नोएडा मिंट’ की स्थापना साल 1984 में हुई थी.  

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कैसे होती है सिक्कों की पहचान? 

‘कोलकाता मिंट’ में बने सिक्कों पर कोई भी चिह्न अंकित नहीं होता है. ‘मुंबई मिंट’ के सिक्कों पर ‘डायमंड’ बना होता है. इसके अलावा ‘मुंबई मिंट’ के सिक्कों पर B या M भी अंकित होता है. ‘हैदराबाद मिंट’ में बने सिक्कों पर ‘स्टार’ चिह्न अंकित होता है. जबकि ‘नोएडा मिंट’ के सिक्कों पर ‘डॉट’ का निशान बना होता है.

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तो कैसी लगी आपको सिक्कों से जुड़ी ये हमारी ख़ास पेशकश?