श्रीराम भक्त हनुमान जी के देश और दुनिया में करोड़ों भक्त हैं. लोगों की बजरंगबली में बड़ी श्रद्धा है. कहते हैं हनुमान जी का नाम लेने भर से मन का ख़ौफ़ ख़त्म हो जाता है. आपने पहलवानों को भी बजरंगबली की पूजा करते देखा होगा. ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी जीवन भर ब्रह्म्चर्य का पालन करते हुए प्रभु श्रीराम की सेवा करते रहे.

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मगर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बजरंगबली ने एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन शादियां की थीं. जी हां, पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी की तीन शादियां हुई थीं. तेलंगाना में हनुमान जी के साथ उनकी पत्नी की एक मूर्ति भी स्थापित की जा चुकी है, जहां लोग पूरी श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करते हैं. हालांकि, बजरंबबली की तीनों शादियों की परिस्थितियां और काल बेहद रोचक रहे हैं.

 तो आइए, जानते हैं हनुमान जी की तीनों शादियों और उनकी पत्नियों के बारे में. 

सूर्यदेव पुत्री सुर्वचला से किया विवाह

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बजरंग बली की पहली शादी सूर्य की पुत्री सुवर्चला से हुई थी. पराशर संहिता में इस बात का उल्लेख मिलता है. कहा जाता है कि हनुमान जी सूर्य भगवान से शिक्षा ग्रहण करते थे. सूर्यदेव को उन्हें नौ विद्याओं का ज्ञान देना था, लेकिन समस्या ये थी कि चार विद्याओं को सिर्फ़ विवाहित ही सीख सकता था. इसी अनिवार्यता के कारण सूर्य भगवान ने अपनी बेटी की शादी हनुमान जी के साथ कर दी. हालांकि, हनुमान जी ने शुरू में इस प्रस्ताव का विरोध किया था, लेकिन वो पांच विद्याएं सीख चुके थे. ऐसे में सूर्य देव के समझाने के बाद वो शादी के लिए मान गए. कहते हैं कि शादी होने के बाद सुवर्चला हमेशा के लिए तपस्या में लीन हो गईं. 

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रावण के भी दामाद थे हनुमान जी

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हनुमान जी ने दूसरी शादी रावण की पुत्री अनंगकुसुमा के साथ की थी. पउम चरित के मुताबिक, रावण और वरूण देव के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें हनुमान जी वरुण देवता की तरफ़ से लड़े थे. युद्ध में रावण की पराजय हुई, जिसके बाद उसने अपनी पुत्री का विवाह हनुमान जी से कर दिया. 

वरुण देव की पुत्री सत्यवती से की तीसरी शादी

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रावण के ख़िलाफ़ युद्ध में हनुमान जी ने वरुण देवता का साथ दिया. कहते हैं जब युद्ध में वरुण देवा की विजय हुई, तो उन्होंने ख़ुश होकर अपनी पुत्री सत्यवती का विवाह हनुमान जी से कर दिया. 

तीन शादियां कीं फिर भी हमेशा रहे ब्रहम्चारी

गौरतलब है कि विभिन्न परिस्थितियों के कारण हनुमान जी को तीन शादियां करनी पड़ीं, लेकिन फिर भी वो कभी वैवाहिक जीवन में नहीं रहे. आजीवन ब्रह्मचर्य पालन करने के कारण हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी कहा गया है.