मुग़लों के बारे में कहे बिना भारत का इतिहास अधूरा है. कई वर्षों तक मुग़लों ने भारत पर शासन किया और भारतीय इतिहास में अपनी जगह बनाई. भारत में मुग़ल साम्राज्य की स्थापना करने वाला बाबर उर्फ़ ज़हीरुद्दीन मुहम्मद था. बाबर का जन्म उज़्बेकिस्तान में हुआ था और इसने काबुल और क़ंधार को जीतकर बादशाह की उपाधि हासिल की थी. दिल्ली में मुग़ल साम्राज्य की नींव रखने से पहले 'बाबर' ने भारत पर पांच बार आक्रमण किया था.


वहीं, कहा जाता है कि बाबर के इतिहास के कुछ पन्ने सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक से भी जुड़े हैं. आइये, इस लेख के ज़रिए आपको बाबर से जुड़े कुछ किस्सों के साथ बताते हैं इतिहास की वो घटना जब बाबर ने गुरु नानक जी को क़ैद कर लिया था. 

इब्राहिम लोदी को हराकर बना दिल्ली का बादशाह   

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दिल्ली में मुग़ल साम्राज्य की स्थापना से पहले दिल्ली इब्राहिम लोदी के कब्जे में थी. बाबर ने 1526 की पहली पानीपत की लड़ाई में इब्राहिम लोदी को हराकर दिल्ली सल्तनत को अपने कब्जे में ले लिया था. इसके बाद ही उसने यहां मुग़ल साम्राज्य की स्थापना की थी. 

जब गुरु नानक यात्रा पर थे  

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कहा जाता है कि गुरु नानक 1469 से लेकर 1539 तक धरती पर रहे. जिस समय बाबर के सैनिक एमनाबाद नामक जगह पर अत्याचार कर रहे थे, गुरु नानक अपनी यात्रा के दौरान वहां कुछ समय तक थे. बाबर के सैनिक एमनाबाद के लोगों पर बेरहमी से ज़ुल्म ढा रहे थे. सैनिकों ने न सिर्फ़ लोगों को अपने घोड़ों तले रौंदा, बल्कि लूटपाट भी मचाई. ये सब गुरु नानक ने अपनी आंखों से देखा.

गुरु नानक को बनाया गया बंदी  

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एमनाबाद में लूटपाट के बाद बाबर के सैनिक सामान ढोने के लिए लोगों को पकड़ रहे थे. इस बीच सैनिकों की नज़र गुरु नानक पर पड़ी. कहते हैं कि गुरु नानक लंबे और मजबूत कद-काठी के व्यक्ति थे. उन्हें देखते ही सैनिकों ने सामान ढोने के लिए उनसे कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. गुरु नानक के मुंह से न सुनते ही सैनिकों ने उन्हें बंदी बना लिया.  

 कै़दखाने में किया गया बंद 

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बाबर के सैनिकों ने गुरु नानक को पकड़कर क़ैदखाने में बंद कर दिया था. कहते हैं कि क़ैदखाने में उन्हें देखते ही बाकी लोग नतमस्तक हो गये थे. ये बात बाबर के पास भी पहुंची, तो वो ये देखने के लिए गुरु नानक के पास आया.  

बाबर ने मांगी माफ़ी  

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कहते हैं कि जैसे ही बाबर, गुरु नानक जी के पास पहुंचा, तो उनके चेहरे का तेज देखकर वो दंग रह गया. वहीं, गुरु नानक के प्रभावशाली और सुंदर शब्दों को सुन बाबर ने भी उनके सामने अपना सिर झुका लिया और उन्हें रिहा कर दिया. बाबर ने कहा कि मेरे सैनिकों से हुई इस ग़लती के लिए मैं आपसे माफ़ी मांगता हूं. इस बात पर गुरु नानक जी ने बाबर से कहा था कि माफ़ी मुझसे नहीं बल्कि अपने अल्लाह से मांगों. साथ ही उनसे मांगों जिन पर तुमने ज़ुल्म किए हैं.   

बाबरगाथा में नानकदेव की चार रचनाएं

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बाबरगाथा में गुरु नानक देव की चार रचनाएं मौजूद हैं. रचनाओं के पहले चरण में गुरु नानक बाबर के सैनिकों द्वारा महिलाओं पर किए गए अत्याचार का वर्णन है. दूसरे चरण में गुरु नानक ने बाबर के हमलों को भारत को आग में झौंक देना जैसा बताया. तीसरे चरण में राजघरानों की महिलाओं का जिक्र है. वहीं, चौथे चरण में गुरु नानक ने रब का स्मरण किया है.