भारत पर बाहरी शक्तियों की नज़र हमेशा से रही है. यही वजह थी कि यहां समय-समय पर आक्रमण हुए और सत्ता का हस्तांतरण होता गया. भारत में मुगलों और अंग्रेजों ने लंबे समय तक राज किया. जानकारी के लिए बता दें कि 1526 ईसवी में बाबर ने पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोदी को हराकर दिल्ली में मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी थी. 

वहीं, इतिहासकारों ने मुग़लों को लेकर विभिन्न मत प्रस्तुत किए, किसी ने मुगलों को कट्टर, तो किसी ने हिंदू विरोधी बताया. वैसे क्या आप जानना चाहते हैं मुग़लों को लेकर महात्मा गांधी के क्या विचार थे. आइये बीबीसी की एक रिपोर्ट के आधार पर जानने की कोशिश करते हैं मुग़लों को लेकर महात्मा गांधी के विचार.  

कैम्ब्रिज़ यूनिवर्सिटी में महात्म गांधी का भाषण 

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1 नवंबर 1931 को महात्मा गांधी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के Pembroke College में आयोजित एक बैठक में शामिल हुए, जहां उन्होंने खुलकर अंग्रज़ों और मुग़लों को प्रति अपने विचार प्रकट किये. महात्मा गांधी ने कहा कि भारत में अंग्रेज़ों के आने से पहले का इतिहास देखें, आपको आज के जैसे हिंदू-मुस्लिम दंगों के उदारहण नहीं दिखाई देंगे. गांधी ने कहा कि मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब के शासनकाल में हमें हिंद-मुस्लिम दंगे नहीं दिखाई देते. कहते हैं कि इस सभा में गांधी अपने तय समय सीमा से 1 घंटे ज़्यादा बोले थे.  

औरंगज़ेब उतना बुरा नहीं था  

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1 नवंबर 1931 की दोपहर को महात्मा गांधी ने कैम्ब्रिज़ यूनिवर्सिटी में ही एक और भाषण दिया. उन्होंने कहा कि जब भारत पर ब्रिटिश शासन नहीं था, तब हम ज़्यादा शांतिप्रिय थे. यहां हिंदू-मुस्लिम लड़ते नहीं थे. गांधी ने आगे कहा, “स्वर्गीय मौलाना मुहम्मद अली मुझसे कहा करते थे कि अगर अल्लाह ने मुझे और ज़िदगी बख्शी, तो मैं भारत में मुस्लिम हुक़ूमत का इतिहास ज़रूर लिखूंगा. मैं उसमें ये ज़रूर लिखूंगा कि औरंगज़ेब उतना बुरा नहीं था, जितना अंग्रेज़ी इतिहासकारों ने उसे दिखाया.  

महात्मा गांधी की किताब ‘हिंद स्वराज’ 

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महात्मा गांधी की किताब ‘हिंद स्वराज’ में महात्मा गांधी ने ज़ोर देते हुए कहा है कि विदेशी इतिहासकारों ने भारत का इतिहास लिखने में दुर्भावना और राजनीति का इस्तेमाल किया. मुग़लों के लेकर टीपू सुल्तान के इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और और उन्हें हिंदू विरोधी दिखाया गया. 

औरंगज़ेब से प्रभावित थे गांधी 

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बीबीसी के अनुसार, औरंगज़ेब की सादगी और श्रमनिष्ठा से गांधी काफ़ी ज़्यादा प्रभावित थे. 21 जुलाई 1920 को 'यंग इंडिया' में गांधी ने लिखा था कि पंडित मालवीयजी कहते थे कि जब तब राजा-महाराजा देश के लिए कपड़े नहीं बुनने लगते, तब तक उन्हें संतोष नहीं मिलेगा. उनके लिए औरंगज़ेब एक अच्छा उदाहरण हैं, जो अपनी टोपियां खुद ही बनाया करते थे.  

गुजराती पत्रिका 'नवजीवन’

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गुजराती पत्रिका 'नवजीवन’ (20 अक्तूबर 1921) में उन्होंने लिखा कि जो अमीर है, वो मेहनत न करे, ऐसा विचार तो हमारे मन में आना ही नहीं चाहिए. औरंगज़ेब को काम करने की ज़रूरत नहीं थी, लेकिन वो अपनी टोपियां बनाता था. गांधी ने आगे लिखा कि हम तो दरिद्र हो चुके हैं, इसलिए काम करना, तो हमारा दोहरा फर्ज़ है.  

मुग़लों को लेकर गांधी ने कही एक बड़ी बात  

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बीबीसी के अनुसार, उड़ीसा के कटक की एक सार्वजनिक सभा में महात्मा गांधी ने मग़लों को लेकर एक बड़ी बात कह डाली. उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासनकाल में भारतीय मानसिक रूप से ग़ुलाम हो गए थे, लेकिन ऐसा मुग़ल काल में नहीं था. मुग़लों के वक़्त भारतीयों की चेतना और सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर कभी आंच नहीं आई. गांधी ने आगे कहा कि मुग़लों के समय हमें स्वराज प्राप्त था.