एक दिन लिये सीएम और पीएम सिर्फ़ फ़िल्मों में ही नहीं, बल्कि असल ज़िंदगी में भी बनते हैं. एक ऐसा ही रोचक क़िस्सा इतिहास से भी जुड़ा हुआ है. फ़िल्मी सी लगने वाली ये रिलय लाइफ़ कहानी IAS अफ़सर के. जी. बदलानी की है. 11 अगस्त 1961 ही वो दिन था जब के. जी. बदलानी को दादरा और नगर हवेली का पीएम घोषित किया गया.

dadar and nagar haveli
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15 अगस्त 1947 को जब पूरा देश हिंदुस्तान की आज़ादी का जश्न मना रहा था, तब गोवा, दादरा और नगर हवेली पर विदेशी शासन का राज था. पुर्तगाल किसी भी क़ीमत पर इन तीनों ही क्षेत्रों को छोड़ने के लिये राजी नहीं था. इस दौरान गोवा में राष्ट्रवादियों ने पुर्तगाल के ख़िलाफ़ अभियान शुरू कर दिया. तीनों ही क्षेत्रों के लोगों का एक ही मक़सद था आज़ादी.  

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गायिक लता मंगेशकर ने पुणे में एक कंसर्स्ट कर चंदा जमा किया, ताकि आज़ादी के लिये लड़ने वाले लोग उन पैसों से हथियार ख़रीद सकें. आख़िर लोगों की मेहनत तब सफ़ल हुई जब 21 जुलाई 1954 में दादरा को पुर्तगाली राज से आज़ादी मिल गई. लगभग दो हफ़्ते बाद हवेली को भी आज़ाद कर दिया गया. आज़ाजी के बाद दादरा-हवेली की 'वरिस्ता पंचायत' बना दी गई. 1 जून 1961 तक 'वरिस्ता पंचायत' का राज चला. इसके साथ ही औपचारिक रूप से भारतीय संघ में प्रवेश करने की विनती भी की गई.  

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अभी दादर-हवेली का भारत में एक संघीय क्षेत्र के रूप में आधिकारिक विलय नहीं हुआ था. इसी कारण भारत सरकार की तरफ़ से प्रशासन पर नियंत्रण बनाने के लिये एक दूत भेजा गया. सरकार ने ये बड़ी ज़िम्मेदारी गुजरात कैडर के आईएएस अफ़सर के. जी. बदलानी को सौंपी थी. एक दिन के लिये प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने पीएम जवाहर लाल नेहरू के साथ हुए अनुबंध पर साइन किये. इसके साथ ही आधिकारिक रूप से दादर और नगर हवेली भारय में विलय हो गई.  

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भारतीय इतिहास में सिर्फ़ एक ही क़िस्सा दर्ज किया गया है.