रामायण... एक ऐसा धारावाहिक जिसके प्रसारण के वक़्त देश की सड़कें सुनसान हो जाती थी. एक टीवी के सामने दर्जनों लोग बैठकर, राम की गाथा देखते थे. कुछ तो आरती की थाल लगाकर टीका-चंदन भी करते थे.

1986 में दूरदर्शन पर आई रामानंद सागर की रामायण में राम का किरदार अरुण गोविल ने निभाया, सीता का किरदार दीपिका चिखलिया ने और लक्ष्मण का किरदार सुनील लहरी ने.

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लेकिन जिसकी मूंछों से हमारे रौंगटे खड़े हो जाते थे और जिसकी अट्टाहास से हर कोई परिचित था, वो था रावण. रावण का किरदार अरविंद त्रिवेदी ने निभाया था. इस किरदार के कारण अरविंद को बहुत से लोग 'लंकेश' नाम से भी पुकारने लगे थे. रावण का किरदार इतना प्रभावशाली था कि रावण के संवाद हर बच्चे और बड़े की ज़बान पर चढ़ गए थे.

अपने करियर की शुरुआत गुजराती रंगमंच से करने वाले अरविंद ने 300 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया था.

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मध्य प्रदेश में जन्मे अरविंद कहते हैं कि रावण के किरदार ने उन्हें राम का भक्त बना दिया. रामानंद सागर से अपनी पहली मुलाक़ात के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि Audition में पहला संवाद बोलने के बाद ही उनका चयन कर लिया गया.

1991 में अरविंद साबरकांठा सीट से राज्य सभा के सांसद चुने गए और 1996 तक राज्य सभा सदस्य रहे. 2002 में उन्हें सीबीएफसी का चीफ़ भी बनाया गया था. आजकल वे अपना ज़्यादातर वक़्त घर पर ही बिताते हैं.

आज रावण के टीवी पर प्रसारित हुए तीन दशक बीत गए हैं लेकिन रामायण के वो किरादार हम सबकी स्मृति में हैं. उनसे हमारे बचपन की कई यादें जुड़ी हैं.

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