भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राजनीति के सबसे सम्मानजनक दिग्गज, अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे. वो दिल्ली के AIIMS में लाइफ़ सपोर्ट पर थे. वाजपेयी जी 93 साल के थे और उन्हें दो महीने पहले सीने में तकलीफ़ के चलते भर्ती करवाया गया था. उनकी हालत को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण अडवाणी, अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व PM मनमोहन सिंह, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बाकी बड़े नेता AIIMS में मौजूद थे.

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3 बार भारत के प्रधानमन्त्री रहे, वाजपेयी उन कुछ बड़े नेताओं में से थे, जिन्हें अपनी पार्टी के नेताओं के साथ, विपक्षी पार्टी के नेताओं का भी प्यार और सम्मान मिला. इसकी वजह उनका दूसरों से लिए सम्मान और एक एक आदर्श राजनीतिक जीवन था.

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ओछी राजनीति और आरोप-प्रत्योप के दौर में भी वाजपेयी ने सही राजनीति को अपना आदर्श माना. उनके मूल्यों के बल पर ही भारतीय जनता पार्टी जनमानस का विश्वास जीत पायी और धीरे-धीरे सबसे बड़ी राजनितिक पार्टी के रूप में उभरी.

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1980 में जान संघ के टूटने के बाद भारतीय जनता पार्टी की नींव रखने वाले वाजपेयी जी वो पहले गैर-कोंग्रेसी प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने 5 साल का टर्म पूरा किया. 1998 से लेकर 2004 तक उनके कार्यकाल में सरकार ने सुशासन या गुड गवर्नेंस का नारा दिया था. उनके इस कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए गए, जिसमें पोखरण परीक्षण, लाहौर समिट,प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, देश के हाईवे को जोड़ने का काम प्रमुख था. उनके इस कार्यकाल में कई चुनौतीपूर्ण मौके भी सामने आये, जिसमें 99 की कारगिल वॉर, एयरलाइन हाईजैक, संसद पर हमला जैसे मुद्दे थे.

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पाकिस्तान और कश्मीर के मुद्दे को पाकिस्तान के साथ बातचीत से हल करने के अपने फ़ैसले पर अडिग रहने वाले अटल बिहारी वाजपेयी ने UN में पहली बार हिंदी में भाषण दे कर विश्व पटल पर भारत की छवि बनायी थी.

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उनके जैसा नेता, विचारक, कवि दोबारा जन्म नहीं ले सकता. उनकी मृत्यु भारतीय राजनीति में एक ऐसा रिक्त स्थान छोड़ गयी है, जिसकी पूर्ती नहीं हो सकती.

आप अपने विचारों के रूप में सदैव अमर रहेंगे. ऊपर वाला आपकी आत्मा को शांति दे.

झुलासाता जेठ मास

शरद चांदनी उदास

सिसकी भरते सावन का

अंतर्घट रीत गया

एक बरस बीत गया