किसी के साथ अच्छा करो तो आज नहीं तो कल, आपके साथ कुछ अच्छा ज़रूर होता है. मुंबई में ऑटो चलाने वाले अमित गुप्ता इसकी मिसाल हैं.

Times of India में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, पेशे से टीचर, सरला नामबूदिरी हर दिन अपनी गाड़ी से स्कूल जाती थीं और थोड़ी दूर पर पार्क कर देती थीं. चलने में मुश्किल होने की वजह से वो पार्किंग से स्कूल तक ऑटो में ही जाती थीं. 21 दिसंबर को भी ऐसा ही हुआ लेकिन स्कूल पहुंचने के बाद उन्हें याद आया कि वो कैश और ज़रूरी दस्तावेजों से भरा वो अपना बैग ऑटो में ही भूल गयीं हैं.

इस बैग में छात्रों की जमा करी हुई फ़ीस, 80000 रुपये कैश था. साथ में नामबूदिरी के क्रेडिट और डेबिट कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, गाड़ी की RC, दो फ़ोन और घर की चाबियां भी.

उन्होंने फ़ौरन अपने स्कूल के Peon को ऑटो वाले को ढूंढने के लिए भेजा, तो पास ही एक पान वाले ने बताया कि उस ऑटो वाले का नाम अमित गुप्ता है. नामबूदिरी FIR दर्ज कराने ही वाली थीं, कि तभी अमित उनका बैग लौटाने स्कूल पहुंच गया.

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सब कुछ इतना अचानक हुआ कि अपना बैग वापस पाने की ख़ुशी में नामबूदिरी उस ऑटो वाले का नाम तक पूछना भूल गयीं और वो चला गया. बाद में पान वाले से नंबर तो मिला लेकिन वो ग़लत निकला. फिर भी किसी तरह उसका सही नंबर निकलवा कर, उन्होंने ऑटो वाले को अपने स्कूल बुलाया.

बातचीत करने पर पता चला कि ऑटो चालक अमित गुप्ता के दो बच्चे हैं लेकिन आर्थिक रूप से हालात अच्छे नहीं होने की वजह से वो उन दोनों की पढ़ाई नहीं करवा पा रहा था. नामबूदिरी ने न सिर्फ़ अमित गुप्ता को 10,000 रुपये कैश दिए बल्कि एक अध्यापक होने के नाते, उसके दोनों बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाने की ज़िम्मेदारी भी ले ली.

शायद ही अमित गुप्ता ने कभी सोचा होगा कि वो अपनी बेटियों को पढ़ा पाएंगे लेकिन साफ़ नीयत और एक ईमानदारी की वजह से उनकी ज़िंदगी चुटकियों में बदल गयी.

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