कहते हैं मेहनत और लगन से कमाई गई कोई भी चीज़ अगर खो भी जाए, तो वो एक न एक दिन आपको वापस मिल ही जाती है. ऐसा ही कुछ मुंबई के दर्शन पाटिल के साथ भी हुआ.

घटना बीते 9 सितबंर की है. 36 वर्षीय दर्शन पाटिल नामक शख़्स ने मुंबई के खालापुर टोल प्लाज़ा पर, 230 रुपये का टोल बिल देने के लिए डेबिट कार्ड स्वाइप किया. टोल का बिल देते वक़्त पाटिल को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं होगा कि ये उन्हें काफ़ी महंगा साबित होने वाला है. दरअसल, 230 रुपये के लिए कार्ड स्वाइप करना पाटिल को इतना भारी पड़ा कि वो साइबर क्राइम का शिकार बन गए और मात्र चंद घंटों को भीतर ही उनके खाते से 87 हज़ार रुपये चोरी हो गए.

इतनी पैसों का Transaction देख कर पाटिल के होश उड़ गए और उन्होंने मामले में ICICI बैंक से संपर्क कर, पैसे लौटाने के लिए कहा. इधर बैंक ने पाटिल की शिकायत तो सुनी, पर साइबर क्रम का कोई सबूत न होने पर उन्होंने पैसे लौटाने से मना कर दिया. बैंक से मदद न मिलने के बाद पाटिल की आखरी उम्मीद भी टूट गई.

अचानक इस केस में ट्विस्ट आता है और पेशे सेल्स मैनेजर पाटिल को पता चलता है कि उनकी खोई हुई रकम वापस मिल गई है. पैसे वापस मिलने की ख़ुशी जताते हुए पाटिल बताते हैं, 'एक अधिकारी ने बताया कि बैंक द्वारा की गई आंतरिक जांच से पता चला है कि पैसों का ये लेन-देन महज़ कुछ सेकेंड्स के भीतर किया गया है और कोई भी व्यक्ति कुछ ही सेकेंड के अंतराल में इतनी बड़ी रकम की निकासी नहीं कर सकता. इसके साथ ही बैंक ने मेरे पैसे वापस लौटाने का फ़ैसला किया'.
बैंक के एक अधिकारी ने बताया, 'अगर हमें इस तरह की कोई शिकायत मिलती है, तो सबसे पहले हम एक जांच टीम का गठन कर, मामले की सच्चाई का पता लगाते हैं. वहीं अगर जांच में साइबर क्राइम का ज़रा भी शक होता है, तो हम ग्राहक के पैसे लौटा देते हैं.'

पाटिल ने ये भी बताया कि आज तक उन्होंने कभी भी किसी के साथ अपना एटीएम पिन साझा नहीं किया और उन्हें इस बात का ज़रा भी अंदाज़ा नहीं है कि उनका पिन कैसे चोरी हो गया. 

Source : mid-day