भारतीय सिनेमा हमेशा से ही दो हिस्सों में बटी रही है. एक कमर्शियल और दूसरी ऑफ़ बीट. कमर्शियल फ़िल्मों के लिए हमेशा से ही सेंसर बोर्ड सॉफ़्ट कॉर्नर रखता है, लेकिन ऑफ़ बीट सिनेमा पर उसकी कड़ी नज़र होती है और ऐसी फ़िल्मों पर सेंसर की कैंची या फिर बैन करने का ख़तरा हमेशा ही बना रहता है. ऐसा ही कुछ हुआ 'LIPSTICK UNDER MY BURKHA' फ़िल्म के साथ.

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भारतीय सेंसर बोर्ड ने इस फ़िल्म के विषय को जनता के लिए मुनासिब नहीं समझा. जहां दकियानूसी ख़्याल वाले सेंसर बोर्ड ने इसे बैन कर दिया, वहीं अंतर्राष्ट्रीय मार्किट में इस फ़िल्म ने खूब वाहवाही बटोरी.

इस फ़िल्म को Indian Film Festival, लॉस एंजेल्स में दिखाया गया और उसे Golden Globe Awards के लिए भेजने की पेशकश की है. ये फ़िल्म मुंबई फ़िल्म फ़ेस्टीवल और टोक्यो इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में 'द स्पिरिट ऑफ़ एशिया' अवॉर्ड भी जीत चुकी है.

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Indian Film Festival of Los Angeles की डायरेक्टर Christina Marouda ने इस फ़िल्म की स्क्रीनिंग से पहले कहा कि 'मुझे बहुत गर्व है कि Hollywood Foreign Press Association ने इस फ़िल्म से स्क्रीनिंग की शुरुआत की है. फ़िल्म की डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव इस फ़िल्म को Golden Globes Campaign के लिए भेज सकती हैं.'

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फ़िल्म को बैन करते वक़्त सेंसर बोर्ड ने कहा था कि 'कहानी महिलाओं पर केंद्रित है और इसमें सामान्य जीवन से कहीं आगे बढ़ कर आगे की कल्पनाएं हैं. सेंसर बोर्ड का कहना है कि इसमें कई विवादास्पद सेक्शुअल सीन हैं, गालियों वाले शब्द हैं और सोसायटी के उस हिस्से को टच किया गया है जो काफी संवेदनशील है, इसलिए इसे पास नहीं किया गया.' इस दलील के बाद फ़िल्म को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सराहा जाना काबिले तारीफ़ है.

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