बात करने का हसीं तौर-तरीका सीखा

हमने उर्दू के बहाने से सलीका सीखा

शायर मनीष शुक्ल के इस शेर से हम अपनी बात की शरुआत करते हैं. उर्दू, एक ज़बान जिस की पैदाइश भारत में हुई और ये ख़ास तौर पर बोली भी सिर्फ़ भारत (अविभाजित भारत) में ही जाती है.

इस ज़बां में बहुत ग़हराई है, एक आम इंसान अपनी बातचीत में थोड़ी बहुत भी उर्दू का इस्तेमाल कर दे तो सुनने वाले को वो शायरी लगती है. बड़े-बड़े शायरों और अफ़साना निगारों ने इस ज़बां की ख़िदमत की है, इसे तराशा है.

इसे मुहब्बत की ज़बां भी कहते है. लेखक खुशवंत सिंह ने उर्दू के बारे में कहा है, 'अगर आप उर्दू सीखना चाहते हैं, तो इश्क कर लीजिए. और अगर इश्क करना चाहते हैं, तो उर्दू सीख लीजिए.'

अगर आप इश्क में हैं तो अच्छी बात है. गर नहीं हैं, तो हम इश्क में पड़ने के लिए नहीं कह रहे, ये आर्टिकल पढ़ लीजिए. यकीनन आपकी उर्दू की हालत थोड़ी बेहतर हो जाएगी.

ये हैं वो ख़ूबसूरत शब्द, जिन्हें आप रोज़ की भाषा में इस्तेमाल कर, उसमें चार-चांद लगा देते हैं:

ये कैसा इश्क है उर्दू ज़बां का, मज़ा घुलता है लब्जों का ज़बां पर कि जैसे पान में महंगा क़िमाम घुलता है- गलुज़ार

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