पुरुषों द्वारा महिलाओं की इज़्ज़त को तार-तार करने की घटनाएं तो अकसर सुनाई देती हैं, मगर अभी जो घटना सामने आई है, वो अपने आप में एक अनोखी घटना है. इस बार एक महिला को प्रताड़ित किसी पुरुष ने नहीं, बल्कि खुद महिला ने किया है. बंगलुरु के विजयपुरा गांव में महिलाओं के एक समूह द्वारा बेहद ही शर्मनाक घटना देखने को मिली.

घटना शनिवार 11 फरवरी की है, जहां करीब 20 से 30 महिलाओं के समूह ने मिलकर एक महिला को बुरी तरह से प्रताड़ित किया. इतना ही नहीं, पीड़ित महिला को सरेआम निर्वस्त्र कर दिया गया और पीटा गया. चौंकाने वाली बात ये थी कि जब उस पीड़िता को बुरी तरह से महिलाओं की भीड़ द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था, तो वह मदद के लिए सबसे गुहार लगा रही थी, चिल्ला रही थी, मगर अफ़सोस किसी ने भी उसकी मदद नहीं की.

Bangalore Mirror के मुताबिक़, महिलाओं की भीड़ ने पीड़िता पर अपने ही पति श्रीकांत की हत्या का आरोप लगाया है. दरअसल, आरोपी का पति श्रीकांत चार फरवरी से गायब था. लेकिन बाद में 11 फरवरी को उसकी लाश बरामद हुई.

अगर कुछ देर के लिए मान भी लें कि सच में इस महिला ने अपने पति की हत्या की भी होगी या फिर उसकी हत्या की साजिश रची होगी, क्या तब भी उसके साथ इस तरह का दुर्व्यवहार करना सभ्य समाज के लिए उचित है? अगर उस महिला ने ये अपराध किया है, तो क्या उसके अपराधों की सज़ा के लिए क़ानून कम पड़ गया था? क्या एक महिला को एक महिला की इज़्ज़त की परवाह नहीं रही? क्या महिलाअों को ज़रा सा भी अपराधबोध नहीं हुआ?

दरअसल, ऐसे बहुत से सवाल हैं, जिनका जवाब शायद भीड़ में शामिल इन महिलाओं के पास नहीं होगा. मगर एक बात इन्हें याद रखनी होगी कि इन महिलाओं ने अपनी संवेदनाओं को ताक पर रखकर गंदे विचार वाले पुरुषों को भविष्य में ऐसा करने के लिए खुद आमंत्रित किया है.

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अकसर कहा जाता है कि महिलाएं ही महिलाओं के दर्द को जानती हैं. मगर यहां तो इंसानियत भी शर्मसार हो गई होगी, जब महिलाओं ने ही एक महिला की अस्मत की सरेआम नीलामी कर दी.

ऐसा लगता है कि अब हमारे समाज में न क़ानून का डर रहा और न ही किसी को इंसानियत की परवाह है. अब लोग इतने असंवेदनशील हो गये हैं कि झूठ-सच का फ़ैसला खुद कर लेना चाह रहे हैं. अब तक इन मामलों में महिलाओं को गंभीर और संवेदनशील माना जाता था, मगर इस घटना ने एक बार फिर से महिलाओं के ऊपर कई तरह के सवाल खड़े कर दिये हैं.

खैर, बात जो भी हो, अगर वो महिला हत्या में शामिल है, तो उसे क़ानून सज़ा देगा, मगर खुद महिलाओं द्वारा एक महिला की इज़्ज़त को सरेआम नीलाम करना ये कहां तक सही है?

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