मुझे फ़ीवर है... मेरे हाथ-पैर में चोट आ गई है इसलिए मैं ये काम नहीं कर सकता. अकसर हम इस तरीके के बहाने बना कर काम से जी चुराते फिरते है न? पर कभी उन लोगों के बारे में सोचा है, जो बचपन से ही दिव्यांग पैदा होते हैं और फिर कुछ ऐसा कर जाते हैं जिसकी किसी ने कल्पना तक न की हो.

एक ऐसी अनोखी कहानी बेंगलुरू की रहने वाली 33 वर्षीय अर्चना तिममारजू की भी है, जो बचपन से 40 प्रतिशत Hearing Ability के साथ पैदा हुई, जिस वजह से उसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि सुनने में असमर्थ होने के कारण उनको बोलने में दिक्कत होती है. पर अपनी कमज़ोरी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। इस दौरान सबसे अच्छी बात ये रही कि उसने अपने सपनों को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया. अर्चना को बाइक की सवारी करना बेहद पसंद है और इसी ज़ुनून के चलते उसने हाल ही में बाइक से 8,300 किलोमीटर का सफ़र तय किया.

इस यात्रा में उन्हें उनके दोस्त डेनियल सुंदरम का भी सहयोग मिला, जो कि एक Geography टीचर भी हैं. बीते 29 अप्रैल को Royal Enfield से अर्चना के सफ़र की शुरूआत हुई और समाप्ति 29 मई Freedom Parkon पर हुई. TOI से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि 'मेरा मकसद दिव्यांग लोगों को प्रेरित करना था, साथ ही बाइक की सवारी के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित करना भी, क्योंकि पुरुष ही हमेशा मज़ा क्यों करें.'

इस बारे में अर्चना की मां का कहना है कि हमें बिल्कुल भी डर नहीं लगा, क्योंकि वो हर दिन हमें वीडियो कॉल कर के जानकारी देती थी कि कहां और कैसी है. मुझे अपनी बेटी पर गर्व है.

यही नहीं, अर्चना ने डेनियल के साथ मिल कर बाइकर्स के लिए Silent Expedition नामक सुमदाय की स्थापना भी की है, जो कि Disable लोगों को अपने सपने साकार करने के लिए प्रोत्साहित करती है.

इसी के साथ अर्चना ने साबित कर दिया कि डर के आगे जीत है!