कुछ दिनों पहले बीएचयू में पिछले साल हुए बवाल को एक साल हुआ एक साल पहले यूपी पुलिस ने शांति से विरोध कर रही छात्राओं पर लाठियां बरसाई थीं. लाठीचार्ज में प्रोफ़ेसर्स को भी नहीं बख़्शा गया था.

इस घटना ने मुझे ख़ासतौर पर झकझोर दिया था क्योंकि बीएचयू मेरी कर्मभूमि रही है. दुख होता था उन गलियों में पुलिसिया पहरा देखकर, जहां कभी हमने न जाने कितने ख़्वाब बुने थे.

एक साल बाद हालातों में कितना अंतर आया है, ये वहां के छात्र ज़्यादा बेहतर ढंग से बता पाएंगे.

एक बाहरी व्यक्ति के रूप में अगर देखा जाए तो ज़्यादा बदलाव नज़र नहीं आता. इस घटना के ठीक एक साल बाद, बीएचयू में छात्रों ने फिर से बवाल किया है, जो कि आम बात है. एक घर में आपस में बरतन खड़कते ही हैं. लेकिन ये झगड़ा कोई आम झगड़ा नहीं था. 4-5 घटों तक छात्रों ने एक-दूसरे को बेरहमी से पीटा, पत्थरबाज़ी की गई, रुईया छात्रावास (मेडिकल छात्रों का छात्रावास) की एक तरफ़ की दीवार तोड़ दी गई, चौराहे पर बने चेक-पोस्ट को जला दिया गया और कई गाड़ियों को भी स्वाहा कर दिया गया.

मामला क्या है?

The Indian Express के मुताबिक, इलाहाबाद का एक युवा 24 सितंबर को अपनी मां को दिखाने आया था, अस्पताल में बिस्तर मिलने में देरी हुई तो उसने डॉक्टर्स के साथ बदसलूकी की. 'शिवजी' नामक इस युवक के साथ डॉक्टर्स ने भी बदसलूकी की और उसे पुलिस के हवाले दे दिया.

इसी रिपोर्ट के अनुसार, एक दूसरी महिला जो उस युवक के साथ थी लॉ फ़ैकल्टी के कुछ छात्रों को इकट्ठा कर के ले आई, जो शिवजी के पहचान के थे. रिपोर्ट के मुताबिक ये छात्र बिड़ला और नए बने LBS (लाल बहादुर शास्त्री) हॉस्टल के थे. LBS में हर फ़ैकल्टी के छात्र रहते हैं तो ये कहना मुश्किल है कि कौन-कौन शामिल था. इन लड़कों ने जूनियर डॉक्टर्स को पीटा.11 बजे के करीब MBBS डॉक्टर्स ने बीएचयू का सिंह द्वार बंद कर दिया और विरोध करने लगे.

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एसएसपी सुरेशराव ए.कुलकर्णी के अनुसार,

बिड़ला हॉस्टल के कुछ लड़के रात में बाहर निकलने के लिए सिंह द्वार की ओर गए लेकिन विरोध में बैठे डॉक्टर्स ने उन्हें बाहर नहीं जाने दिया. एक तरफ़ बिड़ला और LBS हॉस्टल के छात्र और दूसरी तरफ़ लोहिया और धन्वंतरी हॉस्टल के छात्र, दोनों गुटों में झगड़ा हुआ. पत्थरबाज़ी हुई, छात्रों को चोटें भी आईं.

छात्रों का कुछ और ही कहना है

बीएचयू में पढ़ रहे कुछ छात्रों से भी हमने बात की. उनका इस पूरे मामले पर कुछ और ही कहना था.

एक छात्र का कहना था,

हॉस्टल की दीवार तोड़ी गई है. गाड़ियां जलाई गई है, चेकपोस्ट जला दी गई है. पत्थरबाज़ी हुई है. 4-5 घंटे के इस पूरे कांड में प्रशासन कहां था? क्या फ़ोर्स इतनी भी नहीं थी कि ये सब रोका जा सके?

एक अन्य शोधार्थी का ये भी कहना है कि वो तथाकथित युवा पूर्व लॉ फ़ैक्लिटी का छात्र था.

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बीएचयू प्रशासन ने क्या किया?

बीएचयू प्रशासन ने वक़्त रहते छात्रों की लड़ाई नहीं रोकी. 25 सितंबर को बिड़ला 'अ','ब','स', LBS, रुईया, रुईया एनेक्सी, धन्वंतरी हॉस्टल खाली करने का फ़रमान जारी कर दिया गया.

बीएचयू में देशभर के छात्र पढ़ने आते हैं. ये जानते हुए भी प्रशासन ने 'शांति स्थापित' करने के लिए हॉस्टल से छात्रों से निकालने का फै़सला लिया. जबकि पुलिस ने या फिर प्रोक्टोरियल बोर्ड ने वक़्त रहते मामले को नहीं सुलझाया.

सब लगा रहे हैं एक-दूसरे पर आरोप

IMS के छात्रों की Timeline देखें, तो एक छात्र का ये कहना था कि डॉक्टर्स के लिए कोई खड़ा नहीं होता. पूरे देश में डॉक्टर्स की ये हालत है, जोकि एक हद तक सही है.

वहीं शोधार्थियों का कहना है कि बिड़ला में सिर्फ़ उपद्रवी छात्र नहीं रहते, उसमें स्नातकोत्तर और शोधरथ छात्र भी रहते हैं. कुछ महीनों में सबकी परिक्षाएं हैं, सभी को बाहर करना निंदनीय है. कुछ लोगों के घर आस-पास हैं, जिनके नहीं हैं वो भुगत रहे हैं.

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अभी के हालात

यूनिवर्सिटी के गर्म माहौल को देखते हुए 28 तक सभी कक्षाओं को सस्पेंड कर दिया गया. छात्र कब लौटेंगे, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

वीसी की चुप्पी

बातचीत में ये पता चला कि सभी छात्रों को बाहर करने के फ़रमान पर शांत विरोध जताते हुए कुछ छात्र 25 को वीसी से मिलने गए. रात के 2 बजे तक भी वीसी उनसे मिलने नहीं आए. शांति से हो रहे विरोध में पुलिस वाले तैनात थे लेकिन अशांत माहौल को शांत करने के लिए कोई आगे नहीं आया.

बीएचयू का माहौल दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा है. चीफ़ प्रोक्टर की नियुक्ति पर सभी को एक आस बंधी थी कि छात्र ही नहीं छात्राओं के लिए भी हालात बदलेंगे. इस पूरे बवाल के बाद सभी हॉस्टल के कमरों को खाली करवा दिया गया है और वहां पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. पूरे घटना को देखते हुए मुझे यही लग रहा है कि वक़्त रहते इस मामले को संभाला जा सकता था, लेकिन प्रशासन ने पहले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित की.

मामले पर और जानकारी मिलते ही हम आपको अवगत कराएंगे. एक-एक कर शिक्षा के मंदिरों को यूं बर्बाद होते देखना अच्छा नहीं लग रहा.