हमारे देश की पुलिस अपनी योग्यता के लिये जानी जाती है, लेकिन शायद बिहार पुलिस को अपनी कार्यक्षमता पर बिलकुल भी विश्वास नहीं है. दरअसल, बिहार के सिवान ज़िले की पुलिस ने चोर को पकड़ने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के बजाये तांत्रिक का सहारा लिया. हांलाकि, आम जनता को इस ख़बर से थोड़ा झटका ज़रूर लगेगा, लेकिन यही सच है.

NDTV की ख़बर के मुताबिक, करीब एक हफ़्ते पहले रेलवे कॉलोनी में रहने वाले सह रेल कर्मचारी, अनिल कुमार श्रीवास्तव के घर में चोरी की वारदात हुई. काफ़ी छानबीन करने के बाद भी जीआरपी को मामले में कोई सफ़लता हासिल नहीं हुई. कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब बीते मंगलवार को जीआरपी प्रभारी नंद किशोर ने किस्से को सुलझाने के लिए एक तांत्रिक का सहारा लिया और उसे लेकर पीड़ित के घर पहुंच गये. इसके साथ ही उन्होंने अनिल कुमार से बाबा को घर का हर कमरा दिखाने के लिए कहा.

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तांत्रिक को 'घोड़ा बाबा' के नाम से जाना जाता है. वहीं घटनास्थल पर पहुंचने के बाद घोड़ा बाबा ने उस जगह का निरीक्षण कर कर्मचारी को कुछ अनुष्ठान कराने के निर्देश दिये. यही नहीं, बाबा ने ये तक दावा किया कि रात में होने वाले अनुष्ठान के समय वो चोर का चेहरा सामने ला देंगे. वहीं पूजा-पाठ करने के बाद भी जब बाबा को काम में सफ़लता हासिल नहीं हुई, तो उसने एक और प्रयत्न किया और अगले दिन दोबारा से पीड़ित के घर पहुंच कर उसे अपनी मज़ा र पर जाने के लिए कहा.

वहीं जीआरपी की नकामी और बाबा के ढोंग से परेशान अनिल कुमार ने मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस अधीक्षक (रेलवे) संजय कुमार सिंह को ख़त लिख कर पूरे वाकये की जानकारी दी. साथ ही उनसे मदद की गुज़ारिश भी की.

हैरत वाली बात ये है कि एक ओर जहां लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने की सलाह दी जाती है, वहीं देश की पुलिस टेक्नोलॉजी के ज़माने में केस सुलझाने के लिए तांत्रिकों का सहारा ले रही. ऐसे में आम जनता भला पुलिस पर विश्वास करे भी, तो कैसे?

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