अभाव का बहाना देकर ज़िंदगी जैसी चल रही है वैसे जीते रहना आसान है, लेकिन उसी अभाव को पूरा करके ज़िंदगी की गाड़ी को सफ़लता की पटरी पर लाना थोड़ा मुश्क़िल. मगर एक बात का हमेशा ध्यान रखना, जो लोग कठिनाइयों का सामना करके सफ़लता तक पहुंचते हैं, उन्हें दुनिया सलाम करती है.

ऐसा ही कुछ पिछले कई सालों से सासाराम जंक्शन पर होता आ रहा है, जो रोहातास ज़िले में है. यहां कुछ छात्र रोज़ रात में पढ़ते हुए नज़र आते हैं. ये वो छात्र हैं, जिन्हें पढ़ने की जिज्ञासा तो है, लेकिन इनके पास पर्याप्त साधन नहीं हैं. इसलिए प्लेटफ़ॉर्म की रोशनी में ये प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर 'सक्सेस एक्सप्रेस पर सवार होना चाहते हैं. 

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The Telegraph के अनुसार, ‘यहां हर रोज़ दूर-दराज़ के लगभग 1200 छात्र आते हैं.’

यहां आप किसी भी दिन सुबह या शाम जाएं, आपको छात्रों का एक ग्रुप ज़रूर मिलेगा. ये छात्र प्रवेश परीक्षाओं को क्रैक करने की तैयारी करते हैं. इन्हें ‘Quiz’ के नाम से जाना जाता है.

गौरतलब बात है कि 2002 में कुछ छात्रों ने गांव में बिजली न आने की वजह सासराम स्टेशन पर पढ़ना शुरू किया था, क्योंकि वही एक ऐसी जगह थी जहां बिजली आती थी. इनमें से बहुत सारे छात्र ऐसे थे जिनके पास न तो फ़ीस देने के पैसे और न ही क़िताबें खरीदने के. इसलिए इन लोगों ने ग्रुप बनाकर पढ़ना शुरू किया.

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Business Line के अनुसार, 'Quiz Fraternity' के एक सदस्य ने कहा कि सफ़लता का उच्च स्तर ज़्यादातर लोगों को आकर्षित कर रहा है. करेंट अफ़ेयर्स, रीज़निंग, मैथ के अलावा छात्र अब जॉब इंटरव्यू के लिए भी तैयारी कर रहे हैं.

इस पढ़ाई के जज़्बे के बीच चौंकाने वाली बात ये है कि यहां पर कोई भी ऐसा अध्यापक नहीं है, जिसे फ़ीस दी जाती हो. सब आस-पास के इंस्टीट्यूट के हैं, जो इन लोगों को पढ़ाते हैं.

वरिष्ठ छात्र भी यहां रोज़ आते हैं और उन छात्रों पर सबसे ज़्यादा ध्यान देते हैं, जो समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों से हैं.

कोचिंग सेंटर के संतोष ने Business Line को बताया कि छात्रों को 100 प्रश्नों के लिए केवल 3 रुपये फ़ीस देनी पड़ती है. 

The Telegraph की रिपोर्ट के अनुसार, रेल एसपी जीतेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि प्लेटफ़ॉर्म पर पढ़कर छात्रों की सफ़लता क़ाबिल-ए-तारीफ़ है. प्रतियोगी छात्रों में अधिकांश साधारण परिवार से हैं. अब छात्रों को परिचय-पत्र उपलब्ध कराया जाएगा. इससे प्लेटफ़ॉर्म पर आकर तैयारी करने में कोई परेशानी न हो. गाइड की भी व्यवस्था हो रही है. इसके अलावा उन्होंने बताया रेलवे अधिकारियों ने हमेशा छात्रों के साथ सहयोग किया है और वो इस जगह को साफ़-सुथरा रखने और किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके लिए सुनिश्चित करते हैं. साथ ही 2017 में Quiz के 500 से अधिक रेगुलर छात्रों को पहचान-पत्र भी मुहैय्या कराए गए हैं.

India Today की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में हर साल IAS अधिकारी बनने वाले छात्रों की संख्या ज़्यादा होती है. ये छात्र कई बाधाओं को पार करते हुए अपनी मंज़िल को पाने की कोशिश करते हैं.

अब तक स्टेशन पर पढ़ाई कर सफ़ल होने वालों में विपिन कुमार (एसएससी), अमरेंद्र कुमार, कन्हैया कुमार, सहेंद्र कुमार सिंह, मुन्ना कुमार, पिंटू कुमार, मणिकांत, ज्योति प्रकाश, हरेंद्र राम, संजय कुमार, मिथिलेश कुमार, चंदन कुमार गुप्ता, ओमप्रकाश सिंह, गुंजन कुमार सिंह, बृजलाल कुमार, राजनारायण कुमार, कृष्णकांत कुमार (रेलवे) अजय कुमार (बीएसएससी), अशोक कुमार (कंप्यूटर आपरेटर), ओमप्रकाश (बीएमपी) हैं.