बॉलीवुड में अब तक कई लोगों के जीवन पर आधारित फ़िल्में बनाई जा चुकी हैं. हाल में संजय दत्त की बयोपिक संजू रिलीज़ हुई, जिसे दर्शकों की ख़ूब सराहना और प्यार मिला. पर शायद अब वो समय आ गया है, जब देश के कुछ होनहार लोगों पर भी फ़िल्में बनाई जानी चाहिए. ये ऐसे लोग हैं जिनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन फिर भी इन्होंने हार नहीं मानी और हीरो बन कर सबसे सामने आए.

1. योगेंद्र सिंह यादव

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19 साल की उम्र में परमवीर चक्र पाने वाला ये जवान 1999 कारगिल युद्द के दौरान 14 गोलियां लगने के बाद भी टाइगर हिल पर कब्ज़ा करने और 8 दुश्मन सौनिकों को भगाने में कामयाब रहा था. ऐसा पहली बार हुआ था, जब किसी को इतनी कम उम्र में वीरता पुरस्कार से नवाज़ा गया था.

2. सलमान रुश्दी

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जाने-माने लेखक सलमान रुश्दी कई सालों से मौत के फ़तवे के साये में जी रहे हैं. ईरान के धार्मिक नेता आयातोल्लाह खोमैनी ने उनकी किताब 'शैतानी आयतें' के प्रकाशन के बाद 14 फरवरी, 1989 को उनके ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया था.

3. बाईचुंग भूटिया

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भारतीय फ़ुटबॉल के इस खिलाड़ी की राहें बिल्कुल भी आसान नहीं थी, छोटी सी उम्र के इस एथलिट को बचपन में स्पोर्ट्स का बिल्कुल भी शौक नहीं था. वहीं उनके किसान पिता की मृत्यु के बाद 9 साल की उम्र में उन्हें फ़ुटबॉल में स्कॉलरशिप मिली और यहीं से शुरू हुई उनके जीवन की एक नई शुरूआत.

4. गौरी लंकेश

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गौरी लंकेश कन्नड़ की भारतीय क्रांतिकारी पत्रकार थी. वो बैंगलोर से प्रकाशित होने वाली कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका लंकेश में संपादिका के रूप में कार्यरत थी. 4 सितंबर, 2017 को अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार कर उनकी हत्या कर दी थी.

5. जादव 'मोलाई' पायेंग

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अपनी मेहनत और लगन से 1360 एकड़ बंजर ज़मीन पर हरा-भरा जंगल खड़ा कर के जादव ने ये दिखा दिया था कि एक अकेला इंसान कुछ भी कर सकता है. ये जंगल मोलाई जंगल के नाम से जाना जाता है. ये अनोखा कारनामा उन्होंने 1997 में महज़ 16 साल की उम्र में कर दिखाया था.

6. सत्यजीत रे

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भारतीय सिनेमा को कई शानदार फ़िल्में देने वाले लेखक और फ़िल्म निर्माता सत्यजीत रे का बचपन बेहद संघर्ष भरा था. पिता की मौत के बाद उनके परिवार को काफ़ी कठिनाईयों का सामना भी करना पड़ा था. सत्यजीत रे की बायोपिक बनने पर दिल से खु़शी होगी.

7. महमूद

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ये महान हास्य कलाकार फ़िल्मों में आने से पहले बतौर ड्राइवर काम करते थे. ज़िंदगी बिताने के लिए उन्होंने कई अजीबो-गरीब नौकरी भी की, लेकिन शादी होने के बाद उन्हें अधिक पैसों की आवश्यकता थी और यहीं से शुरू हुआ उनका फ़िल्मी सफ़र.

8. पी.वी सिंधु

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पी.वी सिंधु ने ओलंपिक में रजत पदक जीत कर देश का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया था, इसके साथ ही वो ऐसा कारनामा करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं. अपने शानदार खेल के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है.

9. नवाज़ुद्दीन सिद्दकी

नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में शामिल होने से पहले नवाज़ुद्दीन सालों तक केमिस्ट और वॉचमैन के रूप में भी काम कर चुके हैं. अब ऐसे बेहतरीन कलाकार के जीवन पर फ़िल्म बनने में देरी कैसी?

10. अरुंधती रॉय

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अरुंधती रॉय न सिर्फ़ एक शानदार लेखक हैं, बल्कि एक समाजिक कार्यकर्ता भी हैं. 1997 में उन्हें प्रसिद्ध उपन्यास 'द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग' के लिए बुकर पुरस्कार से नवाज़ा जा चुका है.

11. खुशवंत सिंह

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इस भारतीय लेखक, वकील, पत्रकार और नेता के जीवन पर आधारित फ़िल्म कौन नहीं देखना चाहेगा भाई.

12. सुशील कुमार

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सुशील कुमार एक फ़्रीस्टाइल पहलवान हैं. इसके अलावा ओलंपिक में व्यक्तिगत रूप से 2 मेडल जीतने वाले वो एकमात्र खिलाड़ी हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुचंने के लिए उन्होंने बहुत संघर्ष किया. एक दौर था, जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनके भाई को कुश्ती छोड़नी पड़ी थी. यही नहीं, उनके पास Dietary Supplements लेने तक के पैसे नहीं होते थे.

13. रवि शंकर

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प्रसिद्ध सितार वादक का जीवन बिल्कुल उनके म्यूज़िक जैसा था. कभी अच्छा, तो कभी बुरा. ऐसे में एक बायोपिक इन पर भी तो बननी चाहिए.

14. बरुन विश्वास

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पंश्चिम बंगाल का रहने वाला ये शिक्षक और समाजिक कार्यकर्ता रियल लाइफ़ हीरो है, जिसने कई लोगों की ज़िंदगियां बचाने के लिए अपनी ज़िंदगी गंवा दी थी.

15. सत्येंद्र नाथ बोस

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सत्येंद्र नाथ बोस भारतीय गणितज्ञ और भौतिक शास्त्री थे. इसके साथ ही वो नाम महान वैज्ञानिक आइंस्टीन के साथ भी काम कर चुके थे. सत्येंद्र नाथ बोस को उनके महान कामों के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था.

देश के इन होनहार सितारों पर फ़िल्में ज़रूर बननी चाहिए, हमारा इंतज़ार ज़ारी रहेगा.