20 साल के लंबे अंतराल के बाद सलमान खान को काला हिरन (ब्लैक बक) केस में 5 साल की सज़ा हो गई. फ़िलहाल उन्हें इस केस में बेल मिल गई है. लेकिन एक तरफ सलमान खान को हुई सज़ा से उनके फै़ंस काफ़ी दुखी थे, वहीं एक समुदाय ऐसा है, जो इस फ़ैसले से बहुत ख़ुश था. ये पिछले 20 वर्षों से सलमान खान को इस केस सज़ा दिलाने के लिये संघर्षरत था.

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इस समुदाय को बिश्नोई कहा जाता है, ये ही सलमान खान के केस में मुख्य गवाह हैं. इनका नाम अकसर आपने सलमान खान के केस में सुना होगा. ये कम्यूनिटी काले हिरण को अपने बच्चों के समान प्यार करती है. बिश्नोई समाज को काले हिरण से इतना लगाव क्यों है?

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काला हिरन वैसे तो लुप्त होने वाले जानवरों की सूची में शुमार है और इसका शिकार कानूनन अपराध है, मगर ग़ौर करने वाली बात ये है बिश्नोई समाज इसकी रक्षा सैकड़ों वर्ष पहले से ही करते आ रहा है. काले हिरन को वो अपने आराध्य देव जंबेश्वर का अवतार मानते हैं.

जंबेश्वर उर्फ जंबाजी भगवान का जन्म 15वीं सदी में हुआ था. इन्होंने वन और वन्य प्राणियों की रक्षा, साफ़-सफ़ाई, शाकाहार जैसे 29 धर्मादेश दिये थे. बिश्नोई (बीस-20 और नोई-9) समाज इन सभी आदेशों का पालन करते हैं, इसलिए इन्हें बिश्नोई कहा जाता है.

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पेड़ों और वन्य प्राणियों की रक्षा के लिये विख्यात बिश्नोई, इनके लिये अपनी जान तक देने से पीछे नहीं हटते. कई बार इनके और शिकारियों की बीच संघर्ष भी देखने को मिला है. इंटरनेट पर कई ऐसी फ़ोटोज़ उपलब्ध हैं, जिनमें औरतें हिरण के बच्चे को स्तनपान कराती नज़र आती हैं. ये इसी समाज की हैं.

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रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान में वर्ष 2016 में इनके प्रयासों के कारण ही 1700 शिकारियों को गिरफ़्तार किया गया था. इस समुदाय के लोग राजस्थान के अलावा हरियाणा, यूपी, और मध्य प्रदेश में भी बसे हुए हैं.इनका मानना है कि उनके देवता जंबो जी ने प्रकृति की रक्षा और सहआस्तित्व का संदेश दिया है, उसी का पालन वो कर रहे हैं.

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